ऑनलाइन के दौर में भी शॉपिंग मॉल्स का जलवा बरकरार

मॉल्स सिर्फ शॉपिंग ही नहीं बल्कि लंच, डिनर, कॉफी और हैंगआउट के लिए भी पसंदीदा जगह हैं.

(Photo- Mariyam Usmani)

रमेश कपाड़िया अपनी शादी की 34वीं सालगिरह का जश्न मनाने मुंबई के Jio Drive Mall आए हैं. वो भी कोरोना की पाबंदियों से गुजरने के बाद पहले से ज्यादा आजाद महसूस कर रहे हैं. उनकी पत्नी को शॉपिंग का शौक है. उनकी पत्नी मुमताज कपाड़िया मानती हैं कि "शॉपिंग जिंदगी एंजॉय करने का एक तरीका है, मॉल्स का माहौल और सजावट भी अपनी तरफ आकर्षित करते हैं."

इस बुजुर्ग कपल की ही तरह सलोनी ने भी दोस्तों के साथ वीकेंड पर लोअर परेल पैलेडियम का रुख किया है. सलोनी कहती हैं कि "अगर आप किसी मानसिक परेशानी से जूझ रहे हैं तो शॉपिंग आपके लिए एक थेरेपी साबित हो सकती है, कुछ नहीं तो अगर आप एक पेंसिल और शार्पनर भी खरीदेंगे तो भी आपको खुशी मिलेगी."

कपाड़िया दंपती (Photo - Mariyam Usmani)

लॉकडाउन के बाद शॉपिंग, हैंगआउट और फूड कल्चर बढ़ा है. यही वजह है कि महंगाई और महामारी की मार के बावजूद शॉपिंग मॉल्स ने न केवल अपनी अहमियत बढ़ाई है बल्कि रिटेल सेक्टर में आय और मुनाफा पहले से कहीं बेहतर हुआ है.

रिटेल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (RAI) की रिपोर्ट के मुताबिक प्री-पैनडेमिक के मुकाबले सितंबर 2022 में रिटेल सेक्टर की आय में 21% का इजाफा हुआ है जबकि अक्टूबर 2022 को मॉल्स की धमाकेदार वापसी का महीना माना जा रहा है. RAI की साल दर साल की बिजनेस रिपोर्ट में इस अक्टूबर में स्पोर्ट के सामानों की बिक्री में पिछले साल के मुकाबले 35% बढ़त हुई है जबकि कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स में 32%, खाने-पीने के और किराना से जुड़े सामानों में 15% और फुटवेयर और ज्वेलरी में 13% उछाल आया है. अक्टूबर 2021 के मुकाबले कपड़ों की बिक्री 11% बढ़ी है जबकि फर्नीचर, ब्यूटी, वेलनेस और पर्सनल केयर में यह आंकड़ा सिर्फ 8% की बढ़ोत्तरी ही दर्ज कर पाया है.

(Source: BQ Prime)

शॉपिंग सेंटर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SCAI) के चीफ ऑपरेटिव ऑफिसर अंजीव कुमार कहते हैं कि "पिछले महीनों में ज्वेलरी और इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स की मांग बाजार में ज्यादा बढ़ी है. त्योहारों के सीजन के साथ शादियों की शॉपिंग खूब हो रही है. खुदरा विक्रेताओं ने लंबे समय से इतने अच्छे दिन नहीं देखे थे. ऑफिस के साथ ही स्कूल भी खुल गए हैं , जिसका नतीजा है कि ऑफिस-वियर और स्कूल-वियर की मांग में इजाफा हुआ है. अब लोग देश-दुनिया में ज्यादा ट्रैवल भी कर रहे हैं जिससे ट्रैवल से जुड़े प्रोडक्ट्स की बिक्री बढ़ी है."

शॉपिंग बैग्स (Photo - Mariyam Usmani)

शॉपिंग ट्रेंड, डिस्काउंट और इवेंट

पिछले साल अप्रैल में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान भारत में शॉपिंग-सेंटर्स और मॉल्स को लगभग 3000 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा था. ऐसे में बिजनेस के धुरंधरों ने धंधा दोबारा पटरी पर लाने के लिए वक्त की नजाकत और ग्राहकों का मिजाज समझते हुए शॉपिंग ट्रेंड्स को खूब फॉलो किया है. हीरा- कारोबारी संजय हर हफ्ते गहनों की नई डिजाइन का मुआयना करने मॉल आते हैं. वो कहते हैं कि "हर स्टोर के पास अलग तरह का कस्टमर-सर्कल है और इन दिनों लोगों की आदत बन गई है कि अगर कोई ऑफर चल रहा है तो वह शॉपिंग जरूर करेंगे."

फुटवियर स्टोर (Photo - Mariyam Usmani)

मॉल्स लुभावने शॉपिंग ऑफर्स के अलावा वीकेंड पर अलग-अलग तरह के प्रोग्राम भी करवाते हैं. फिनिक्स पैलेडियम के स्टोर में फैशन कंसल्टेंट नंदिनी पुरोहित कहती हैं कि "कस्टमर की डिमांड के साथ ही प्रोडक्ट की स्टाइल का भी काफी बड़ा रोल है, यही वजह है कि कुछ स्टोर्स में भीड़ ज्यादा होती है जबकि कुछ स्टोर्स पब्लिक का ध्यान खींच पाने में नाकाम रहते हैं. आजकल शादियों के सीजन और ब्लैक फ्राइडे सेल की वजह से मॉल्स में काफी भीड़ उमड़ रही है."

2018 में देश के आठ प्रमुख मेट्रोपोलिटन शहरों में कुल शॉपिंग मॉल्स की संख्या 253 थी जो 2022 में बढ़कर 353 हो गई, जबकि 2023 में 16 नए मॉल्स खोलने की तैयारी है.

शॉपिंग से इतर भी शॉपिंग मॉल्स हैं जरूरी

जैसे रेगिस्तान में रहने वाला इंसान पानी की कीमत जानता है वैसे ही कोरोना काल के बाद लोग आजादी से घूमने की कीमत पहले से ज्यादा समझने लगे हैं. आम जिंदगी में लौटने के बाद शॉपिंग को लेकर अलग तरह की दीवानगी है, इसे रिवेंज शॉपिंग भी कहा जा रहा है. ट्रैवल बिजनेस से जुड़े रौनक कहते हैं  "मैं देखता हूं कि लोग रिवेंज ट्रैवलिंग कर रहे हैं, वही स्थिति शॉपिंग के साथ भी है."

रौनक (Photo - Mariyam Usmani)
मॉल्स सिर्फ शॉपिंग ही नहीं बल्कि लंच, डिनर या कॉफी के लिए भी पसंदीदा जगह हैं. एमबीए की छात्रा शुभांगी यहां अपनी पसंदीदा ‘बबल आइस टी’ के लिए आती हैं तो 10 साल के आद्विक गेम्स के चाव में मॉल्स की ओर खींचे चले आते हैं.

अपने कंफर्ट-जोन के साथ आस-पास लोगों को चहलकदमी करते देखना, एस्थेटिक डिस्प्ले और सिनेमा के अलावा भी मॉल्स में आने के अपने कई फायदे हैं. कोरोना के बाद कस्टमर्स  का रवैया बदला है, नंदिनी पुरोहित कहती हैं– "अब स्टोर्स आने से पहले लोग हर प्रोडक्ट का दाम ऑनलाइन भी चेक करते हैं , कोरोना से पहले ऐसा नहीं था."

ईशा (Photo - Mariyam Usmani)

कोविड के शरूआती दौर में ई- कामर्स ने रफ्तार पकड़ी थी. अपनी हिफाजत और सरकारी पाबंदियों के मुद्दे अहम थे. ऐसे में शॉपिंग मॉल्स के लिए यह तय करना जरूरी था कि लॉकडाउन के बाद मॉल्स में आनेवाले सुरक्षित महसूस करें. रिटेल सेक्टर ने सभी प्रोटोकॉल्स अपनाने के साथ प्रमोशन पर भी ध्यान दिया जिससे धीरे-धीरे मॉल्स में फुटफॉल बढ़ने लगा.