'बुलेट' मोटरसाइकिल बनाने वाली रॉयल एनफील्ड और इसकी पैरेंट कंपनी आयशर मोटर्स इन दिनों चर्चा में है. चर्चा में कंपनी के MD और CEO सिद्धार्थ लाल (Siddhartha Lal) भी हैं. बात भी कुछ वैसी ही है. चलिए, इसे कुछ ताजा आंकड़ों और तथ्यों के जरिए विस्तार से समझते हैं.
Eicher Motors को बड़ा मुनाफा
नवंबर के दूसरे हफ्ते में जब चालू वित्त वर्ष (2022-23) की दूसरी तिमाही के नतीजे आए, तो आयशर मोटर्स की बांछें खिल गईं. जुलाई-सितंबर में कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 76 फीसदी बढ़कर 657 करोड़ रुपये हो गया. पिछले साल की इसी अवधि में यह आंकड़ा 373 करोड़ रुपये था.
अपनी रेगुलेटरी फाइलिंग में कंपनी ने बताया कि इस तिमाही में ऑपरेशंस से आयशर मोटर्स का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू 56 फीसदी बढ़कर 3,519 करोड़ रुपये हो गया. पिछले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही से इसकी तुलना करें, तो यह आंकड़ा 2,250 करोड़ रुपये था. आयशर मोटर्स की कमर्शियल गाड़ियों की बढ़ती मांग की वजह से भी कंपनी को बड़ा मुनाफा हुआ.
Eicher Motors के Q2 नतीजे
कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 76% बढ़कर 657 करोड़ रुपये
पिछले साल की इसी अवधि में यह आंकड़ा 373 करोड़ रुपये था
कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू 56% बढ़कर 3,519 करोड़ रुपये हो गया
पिछले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में रेवेन्यू 2,250 करोड़ रुपये था
रॉयल एनफील्ड ने पकड़ी तेज रफ्तार
वित्त वर्ष 2022-23 की दूसरी तिमाही में आयशर मोटर्स की रॉयल एनफील्ड ने 2,03,451 यूनिट बेचीं. वित्त वर्ष 2022 में इसी अवधि में 1,23,515 मोटरसाइकिलों की बिक्री हुई थी. यानी इसकी बिक्री में 65 फीसदी की बढ़ोतरी रही. इस बढ़ोतरी में 'हंटर' का भी बड़ा योगदान रहा.
दरअसल, तिमाही की शुरुआत हुई थी हंटर 350 के लॉन्च के साथ. युवा वर्ग ने इसमें अच्छी-खासी दिलचस्पी दिखाई. ऊपर से इसे त्योहारी सीजन का भी साथ मिल गया.
''हमारा प्रदर्शन बहुत उत्साहजनक रहा है. हमने नए हंटर 350 के लॉन्च के साथ बहुत तेजी देखी है. इसके अलावा, हम इस हफ्ते के शुरू में अपने शानदार नए क्रूजर- Super Meteor 650 का प्रदर्शन करके बहुत खुश हैं.''सिद्धार्थ लाल, MD & CEO, आयशर मोटर्स
20 साल में 500 गुना तक रिटर्न
रॉयल एनफील्ड की पैरेंट कंपनी आयशर मोटर्स के शेयरों ने हाल ही में 500 गुना तक रिटर्न दिलाया है. लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए यह मल्टीबैगर साबित हुआ है. बीते 20 साल के रिटर्न पर गौर करें, तो पोजिशनल निवेशकों को 500 गुना तक रिटर्न मिला है.
अब इलेक्ट्रिक रॉयल एनफील्ड पर नजर
आने वाला दौर इलेक्ट्रिक गाड़ियों का ही रहने वाला है. ऐसे में रॉयल एनफील्ड की इलेक्ट्रिक बाइक पर सबकी नजरें टिकी हैं. रॉयल एनफील्ड हंटर 350 लॉन्च के दौरान जब सिद्धार्थ लाल से इस बारे में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने एकदम नपा-तुला जवाब दिया था. उन्होंने कहा कि कंपनी इलेक्ट्रिक एनफील्ड लाने की जल्दबाजी में नहीं है, कंपनी अभी 'R&D' में समय ले रही है.
सिद्धार्थ लाल: कभी पलट दी थी कंपनी की काया
आयशर मोटर्स की हालिया कामयाबी के साथ कंपनी के MD और CEO सिद्धार्थ लाल का नाम भी जुड़ा है. एक वजह तो बेहद दिलचस्प है. ये वही सिद्धार्थ लाल हैं, जिन्हें रॉयल एनफील्ड का 'तारणहार' कहा जाता है.
करीब 22 साल पहले कंपनी के हालात आज से बिलकुल अलग थे. रॉयल एनफील्ड के सफर का करीब-करीब अंत ही होने वाला था.
साल 2000 में कंपनी के चेयरमैन थे विक्रम लाल. तब कंपनी के सीनियर एग्जीक्यूटिव्स ने रॉयल एनफील्ड को बंद करने की सलाह दी थी. ऐसे में आगे आए विक्रम लाल के बेटे सिद्धार्थ लाल. उन्होंने 2000-2004 के दौरान रॉयल एनफील्ड के CEO के रूप में अपने कार्यकाल में कंपनी की किस्मत चमकाने में मदद की. कम समय में ही उन्होंने रॉयल एनफील्ड को फिर से खड़ा कर दिया. पहले युवा वर्ग के मन-मिजाज को टटोला, फिर उन्हें ध्यान में रखकर रॉयल एनफील्ड के मॉडलों में जरूरी बदलाव किए. जहां-जहां कमियां थीं, उन्हें दुरुस्त कराया. फिर क्या था, रॉयल एनफील्ड मार्केट लीडर बन गई. कंपनी ने निवेशकों का भी भरोसा जीता. इसके बाद कंपनी को कभी पीछे मुड़कर देखना नहीं पड़ा.
कहां से की पढ़ाई?
सिद्धार्थ लाल के पास लीड्स यूनिवर्सिटी से ऑटोमोटिव इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री है. साथ ही उन्होंने क्रैनफील्ड यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ली है. दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएट हैं, उन्होंने शुरुआती पढ़ाई दून स्कूल से की है.