वोडाफोन आइडिया को बड़ी राहत! सरकार ने ब्याज की रकम को इक्विटी में बदलने की दी मंजूरी

वोडाफोन आइडिया को निर्देश दिया गया है कि वो 10 रुपये फेस वैल्यू पर 16.13 अरब इक्विटी शेयर जारी करे, जिसकी इक्विटी हिस्सेदारी 16,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की हो जाती है.

Source: Reuters

टेलीकॉम ऑपरेटर वोडाफोन आइडिया के लिए राहत की खबर है. भारत सरकार टेलीकॉम कंपनी के 16,000 करोड़ रुपये के ब्याज बकाए को इक्विटी में बदलने को तैयार हो गई है, सरकार ने आज इसकी मंजूरी दे दी है. कंपनी की ओर से आज ये जानकारी दी गई है.

वोडाफोन आइडिया को इस मंजूरी का एक साल से ज्यादा लंबे वक्त से इंतजार था, मंजूरी नहीं मिलने की वजह से टेलीकॉम कंपनी न तो पैसे जुटा पा रही थी और न ही 5G सेवाओं को लॉन्च कर पा रही थी.

सरकार को दिया था प्रेजेंटेशन

कुछ दिन पहले ही वोडाफोन आइडिया की प्रमोटर आदित्य बिड़ला ग्रुप और UK की वोडाफोन ग्रुप ने सरकार को दिए एक प्रेजेंटेशन में इस बात को प्रमुखता से बताया कि बकाए ब्याज को इक्विटी में बदलने में हो रही देरी की वजह से उसकी पैसे जुटाने की योजनाएं अटक गई हैं.

मामले की जानकारी रखने वाले बैंकर्स ने नाम नहीं छापने की शर्त पर BQ Prime को बताया कि अब चूंकि सरकार ने इक्विटी कन्वर्जन प्लान को हरी झंडी दे दी है, गेंद कंपनी के पाले में है, अब कंपनी जल्द से जल्द अपनी पैसे जुटाने की योजनाओं को अंतिम रूप देना होगा.

बैंकों को देना होगा ठोस प्लान

वोडाफोन आइडिया ने अभी बैंकों के सामने पैसा जुटाने का कोई ठोस प्लान नहीं रखा है.जिसकी वजह से ऑपरेशनल क्रेडिटर्स का बकाया भी बढ़ता जा रहा है. जब तक कि कंपनी कोई बड़ी रकम नहीं जुटा लेती है,तस्वीर अभी धुंधली ही रहने वाली है.

एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक - संचार मंत्रालय ने कंपनी अधिनियम के तहत एक आदेश पारित किया है, जिसमें कंपनी को निर्देश दिया गया है कि वह स्पेक्ट्रम नीलामी की किस्तों के टालने से जुड़ी ब्याज की कुल शुद्ध कीमत को और ग्रॉस एडजस्टेड रेवेन्यू को इक्विटी शेयरों में तब्दील करे, और इसको सरकार को जारी करे.

16,000 करोड़ की इक्विटी

वोडाफोन आइडिया को निर्देश दिया गया है कि वो 10 रुपये फेस वैल्यू पर 16.13 अरब इक्विटी शेयर जारी करे, जिसकी इक्विटी वैल्यू 16,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की हो जाती है.

साल 2021 में सरकार ने कर्ज में डूबी टेलीकॉम कंपनियों के लिए राहत पैकेज का ऐलान किया था, जिसमें कंपनियों को इस बात की इजाजत दी गई थी कि वो ब्याज और एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू को इक्विटी में तब्दील करके सरकार को दे दें.