अपने उत्पादों से ‘खादी’ ब्रैंडनेम हटा रही है फैबइंडिया, जानें क्या है पूरा मामला

फैबइंडिया (FabIndia) ने अपने सूती उत्पादों के प्रचार के लिए ‘खादी’ ब्रैंड नाम का इस्तेमाल बंद कर दिया है. खादी इंडिया ने इस बारे में फैबइंडिया को कानूनी नोटिस दिया था. उसका कहना था कि इस शब्द का इस्तेमाल अनुचित व्यापार व्यवहार और उसके ट्रेड नाम का दुरुपयोग है.

अपने उत्पादों से ‘खादी’ ब्रैंडनेम हटा रही है फैबइंडिया (प्रतीकात्मक फोटो)

फैबइंडिया (FabIndia) ने अपने सूती उत्पादों के प्रचार के लिए ‘खादी’ ब्रैंड नाम का इस्तेमाल बंद कर दिया है. खादी इंडिया ने इस बारे में फैबइंडिया को कानूनी नोटिस दिया था. उसका कहना था कि इस शब्द का इस्तेमाल अनुचित व्यापार व्यवहार और उसके ट्रेड नाम का दुरुपयोग है.

खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने फैबइंडिया ओवरसीज प्राइवेट लि. को कानूनी नोटिस भेजकर अपने सभी सूती उत्पादों से खादी शब्द का इस्तेमाल रोकने को कहा था. इसके अलावा उससे अपने सभी शोरूम से ऐसे सभी बैनर भी हटाने को कहा था. सूत्रों ने बताया कि फैबइंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनय सिंह ने केवीआईसी के नोटिस का जवाब देकर कहा है कि वे आयोग के सभी निर्देशों का अनुपालन कर रहे हैं. फैबइंडिया ने कहा कि केवीआईसी के निर्देशों का उसने अनुपालन किया है.

फैबइंडिया ने केवीआईसी के अधिकारियों से बैठक के लिए समय भी मांगा है जिससे वह इस मामले में स्थिति स्पष्ट कर सके और मामले का निपटान कर सके. केवीआईसी के चेयरमैन वीके सक्सेना ने कानूनी नोटिस को उचित ठहराते हुए फैबइंडिया के साथ पूर्व के पत्राचार का जिक्र किया जिसमें निजी कंपनी के खादी चिन्ह आवंटन के आवेदन मामले को समाप्त समझ लिया जाये. सक्सेना ने 29 सितंबर 2016 को पत्र का जिक्र किया जिसमें कहा गया है कि फैब इंडिया के आग्रह पर केवीआईसी के साथ कई बैठकें हुई, अंतिम बैठक 2 अगस्त 2016 को हुई. उन्होंने कहा कि इस बैठक में कहा गया कि फैबइंडिया अपनी सहमति जल्द बतायेगा.

‘दो माह बीतने के बाद भी केवीआईसी को कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, इसके बाद यह मान लिया गया कि आप खादी उत्पादों की बिक्री और संवर्धन के लिये खादी प्रमाणपत्र लेने के इच्छुक नहीं है.’’ संदेश में कहा गया है, ‘मौजूदा परिस्थितियों में खादी चिन्ह के लिये आपके आवेदन को अब समाप्त समझ लिया जाये, इसके बाद इस बारे में किसी तरह के पत्राचार पर विचार नहीं किया जायेगा.’

(न्यूज एजेंसी भाषा से)

लेखक NDTV Profit Desk
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