गरीबी रेखा नीचे, पूरी प्रणाली की समीक्षा की जरूरत : अहलूवालिया

गरीबी के नवीनतम आकलन से खुद को दूर रखने की कोशिश करते हुए योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा कि ये आंकड़े एक विशेषज्ञ समूह द्वारा सुझाई गई प्रणाली पर आधारित हैं और इसमें सुधार की जरूरत है।

गरीबी के नवीनतम आकलन से खुद को दूर रखने की कोशिश करते हुए योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा कि ये आंकड़े एक विशेषज्ञ समूह द्वारा सुझाई गई प्रणाली पर आधारित हैं और इसमें सुधार की जरूरत है।

एनडीटीवी को दिए एक साक्षात्कार में अहलूवालिया ने कहा, ‘तेंदुलकर समिति की सुझाई प्रणाली के आंकड़े देश में गरीबी की संख्या करीब 22 फीसदी बताते हैं। मैं इससे सहमत हूं कि यह रेखा नीचे है।’ विवादित गरीबी रेखा के विरोध में कांग्रेस द्वारा जताए गए संदेह के बारे में अहलूवालिया ने कहा, ‘कपिल सिब्बल ने कहा है कि वर्तमान प्रणाली काल्पनिक है और हमें इसमें सुधार करना चाहिए। हम इससे सहमत हैं।’

योजना आयोग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, गरीबी का अनुपात वर्ष 2004-05 में 37.2 फीसदी थी जो वर्ष 2011-12 में घट कर 21.9 फीसदी रह गई और इसका कारण प्रति व्यक्ति खपत में वृद्धि है।

यह आंकड़े योजना आयोग ने सुरेश तेंदुलकर समिति द्वारा सुझाई प्रणाली के आधार पर तैयार किए हैं। समिति ने स्वास्थ्य, शिक्षा के अलावा ली जाने वाली कैलोरी पर होने वाले खर्च को भी शहरों और गांवों के लिए गरीबी रेखा का मानक बनाया है।

लेखक NDTV Profit Desk