केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने सातवां वेतन आयोग की रिपोर्ट लागू करने के कैबिनेट के फैसले के बारे में मीडिया को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस आयोग की रिपोर्ट को लागू करने से सरकार पर सालाना 1.02 लाख करोड़ रुपये का सालाना भार आएगा।
जेटली की कही बातों का मुख्य अंश -
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- 3 बड़े हाइवे प्रोजेक्टस को कैबिनेट की मंजूरी।
- पंजाब, ओडिशा और महाराष्ट्र में हाइवे का प्रस्ताव।
- महिलाओं के लिए रोजगार का अवसर बढ़ाने की कोशिश।
- महिलाओं को देर तक काम करने की इजाजत का प्रस्ताव।
- 5वां पे कमिशन आया था तो सरकार को उस पर निर्णय लेने के लिए 19 महीने लगे, जबकि 6वें में 36 महीने लगे थे।
- पे और पेंशन के संबंध में कमिशन की सिफारिशों को सरकार ने स्वीकार किया है। 1 जनवरी 2016 से लागू होंगी।
- 47 लाख सरकारी कर्मचारी और 56 लाख पेंशनर्स पर प्रभाव पड़ेगा।
- निजी सेक्टर से सरकारी सेक्टर की सैलरी की तुलना की गई। निजी सेक्टर से तुलना के आधार पर सिफारिश की गई।
- कमेटी की सिफारिशें आने तक मौजूदा भत्ते जारी रहेंगे।
- सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को अधिकतर स्वीकार किया गया है।
- ग्रुप इंश्योरेंस के लिए सैलरी से कटौती की सिफारिश नहीं मानी।
- इस साल एरियर का 12 हजार करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
- क्लास वन की सैलरी की शुरुआत 56100 रुपये होगी।
- वेतन आयोग रिपोर्ट में जो भी कमी है उसे एक समिति देखेगी।
- ग्रैच्युटी को 10 लाख बढ़ाकर 20 लाख किया गया।
- एक्स ग्रेशिया लंपसम भी 10-20 लाख से बढ़ाकर 25-45 लाख रुपये किया गया।
- वेतन आयोग द्वारा सुझाए गए भत्तों पर वित्त सचिव अध्ययन करेंगे और फिर इस अंतिम निर्णय होगा।
- कुछ कर्मचारी संगठनों के विरोध के प्रश्न पर जेटली ने कहा कि विरोध का कोई औचित्य नहीं है।