Zee की दलील- पुनीत गोयनका 'कंपनी' नहीं हैं, सोनी के साथ मर्जर पर न लगे रोक

12 जून को SEBI की तरफ से पुनीत गोयनका के खिलाफ दिए गए आदेश की वजह से जी एंटरटेनमेंट और सोनी पिक्चर्स के प्रस्तावित मर्जर पर भी असर पड़ा है.

Source: Company Website

'पुनीत गोयनका के खिलाफ SEBI के आदेश की वजह से सोनी पिक्चर्स के साथ कंपनी का मर्जर नहीं रोका जाना चाहिए. पुनीत गोयनका कंपनी नहीं हैं.'

NCLT में ये दलील जी एंटरटेनमेंट (ZEEL) की तरफ से पैरवी करते हुए वरिष्ठ वकील जनक द्वारकादास ने दी है. आपको बता दें कि 12 जून को SEBI की तरफ से पुनीत गोयनका (Punit Goenka) के खिलाफ दिए गए आदेश की वजह से जी एंटरटेनमेंट और सोनी पिक्चर्स (Sony Pictures) के प्रस्तावित मर्जर पर भी असर पड़ा है.

SEBI ने पुनीत गोयनका को किसी भी लिस्टेड कंपनी में डायरेक्टर की पोजीशन होल्ड करने पर रोक लगा दी थी. रेगुलेटर के आदेश के मुताबिक, पुनीत गोयनका और उनके पिता सुभाष चंद्रा पर एस्सेल ग्रुप (Essel Group) की कंपनियों के फायदे के लिए जी एंटरटेनमेंट के 200 करोड़ रुपये के फिक्स्ड डिपॉजिट के दुरुपयोग का आरोप है. इस मामले में जी एंटरटेनमेंट की तरफ से SAT (Securities Appellate Tribunal) में अपील की गई है और SAT ने पिछले महीने इस मामले में अपना आदेश सुरक्षित रखा है.

SEBI के आदेश पर बोलते हुए जी एंटरटेनमेंट के वकील द्वारकादास ने कहा, 'स्कीम के मुताबिक पुनीत गोयनका को मर्जर के बाद कंपनी का मैनेजिंग डायरेक्टर बनाए जाने का प्रावधान फाइनल नहीं है. इसके लिए सूचना और प्रसारण मंत्रालय की मंजूरी की भी जरूरत है और ये शेयरधारकों की मंजूरी से बदला भी जा सकता है. मर्जर की स्कीम को सिर्फ इस वजह से नहीं रोका जाना चाहिए'.

SEBI के आदेश पत्थर की लकीर नहीं हैं और इन्हें पलटा जा सकता है. SAT के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट ने भी इन आदेशों को पलटा है.
जनक द्वारकादास, जी एंटरटेनमेंट के वकील

इसके अलावा जी एंटरटेनमेंट की तरफ से दलील पेश करते हुए वरिष्ठ वकील, द्वारकादास ने कंपनीज एक्ट, 2013 का भी हवाला दिया और बताया कि कोई मर्जर किस स्थिति में रिजेक्ट किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि अगर मर्जर का विरोध करने वाले ये साबित कर दें कि मर्जर, पब्लिक पॉलिसी के खिलाफ है, जनता के हित के खिलाफ है या शेयरधारकों या क्रेडिटर्स के हित के खिलाफ है तो मर्जर रोका जा सकता है लेकिन विरोध करने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्थान ने ये साबित नहीं किया है कि इन सिद्धांतों का उल्लंघन हो रहा है.

इस मामले में अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी.

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