यहां कैनवास पर रंगों से बनाई जाती है बेजुबानों की दुनिया

बात जीवों की हो या खामोश एहसासों की, हर चीज का अपना रंग जरूर होता है. सुषमा जैन और शिवानी दुगड़ की दुनिया की एक झलक.

(Photo: मरियम उस्मानी)

एक कलाकार की दुनिया में कूची का इस्तेमाल जादू की छड़ी की तरह होता है. यह छड़ी बेजुबान आवाजों को सहेजती और परोसती है. यह बखूबी समझती है कि कला को सिर्फ फूल, तितली, पहाड़ और इंसानी चेहरों में नहीं बांधा जा सकता. जब रंग कुदरत और बेजुबान जीवों को आवाज देते हैं तो कला भी बस कला नहीं रहती बल्कि बयान बन जाती है.

(Photo: मरियम उस्मानी)

22 नवंबर को जहांगीर आर्ट गैलरी में शुरू हुई सुषमा जैन और शिवानी दुगड़ की पेंटिंग्स की साझा प्रदर्शनी को सही मायनों में एक साथ दो अलग अलग दुनिया का सफर कहा जा सकता है लेकिन दोनों का मकसद कहीं मेल खाता महसूस होता है.

जहां सुषमा जैन की वाइल्ड लाइफ पेंटिंग्स बेजुबान आवाजों का अजायबघर हैं, वहीं शिवानी दुगड़ एक ट्रैवेलर होने के साथ बेनाम एहसासों की रंगरेज हैं और उनकी एब्सट्रैक्ट कला अनछुए किस्सों की दास्तान कहती है.

(Photo: मरियम उस्मानी)

सुषमा जैन अपनी आर्ट के जरिए वाइल्ड लाइफ और पशु प्रेमियों के मन में एक अलग जगह बना रही हैं. वो डिटेल्ड वर्क को तरजीह देती हैं. फिल्म क्रिटीक अनुपमा चोपड़ा कहती हैं कि "सुषमा जैन की पेंटिंग्स कुदरत की शान के बारे में उनकी इस गहरी समझ का भी इजहार करती हैं कि हम कुदरत के सामने कितने छोटे हैं."

मुंबई, दुबई से लेकर सिंगापुर तक प्रदर्शनी कर चुकीं सुषमा का मानना है कि "जानवरों की जिंदगी किसी भी तरह से हमारी अपनी जिंदगी से कम कीमती नही है. दुनिया में प्यार से भरे हुए दिल ही वाइल्ड लाइफ को बचा सकते हैं."

(Photo: मरियम उस्मानी)

जीवों की इस सजीव दुनिया से अलग शिवानी दुगड़ की पेंटिंग्स अनदेखी दुनिया के रास्ते खोलकर हमें नए तरीके से देखना सीखाती हैं. वह कभी आग, कभी छाया, कभी सितारों तो कभी आसमान की बात करती हैं. भारत के अलावा वह न्यूयॉर्क, वाशिंगटन DC और चीन सहित कई देशों में सोलो शो कर चुकी हैं.

(Photo: मरियम उस्मानी)

शिवानी दुगड़ कहती हैं कि हिंदुस्तान में भी महिला कलाकारों के काम को उतनी ही अहमियत मिलनी चाहिए जितना पश्चिमी देशों में मिलती है. एक प्रोफेशनल आर्टिस्ट के तौर पर पहचान बनाने में सुषमा जैन की जिंदगी में उनकी बेटी का अहम रोल है. वह कहती हैं कि उनकी बेटी ही है जो अलार्म सेट कर उन्हें पेंटिंग करने के लिए उकसाती रही है, जो उन्हें याद दिलाती रही है कि एक औरत के लिए जिंदगी में कुछ करना कितना जरूरी है.

(Photo: मरियम उस्मानी)

जहांगीर आर्ट गैलरी में इस नायाब कलाकार जोड़ी की यह कला प्रदर्शनी 28 नवंबर तक चली. देश-दुनिया से आए कला प्रेमियों ने इसे खूब सराहा.