कम राशि के कर्ज यानी माइक्रोलेंडिंग मार्केट के मामले में बिहार अब देश में अव्वल है. माइक्रोफाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन (MFI) से कर्ज लेने वालों की रैंकिंग में बिहार (Bihar) ने तमिलनाडु (Tamil Nadu) को पीछे छोड़ दिया है और ये पहले पायदान पर काबिज हो गया है.
क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनी क्रिफ हाई मार्क (Crif High Mark) की मार्च 2023 की रिपोर्ट में माइक्रोफाइनेंस इंस्टीट्यूशन से कर्ज लेने वाले राज्यों में बिहार सबसे आगे रहा.
सालाना आधार पर बिहार में छोटे-मोटे काम के लिए कर्ज लेने की रकम में 13.5% की ग्रोथ देखने को मिली.
किस प्रदेश ने कितना लिया कर्ज
मार्च 2023 तक बिहार में 48,900 करोड़ रुपये के ऐसे छोटे लोन दिए गए, जो कि देश भर में ऐसे कुल कर्ज का 14.5% है. वहीं, तमिलनाडु में लोगों ने कुल 46,300 करोड़ रुपये के ऐसे लोन लिए, जो कि कुल कर्ज का 13.7% है.
साल में कितना बढ़ा कर्ज
मार्च 2023 तक ओवरऑल MFI पोर्टफोलियो में 3.37 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया जो पिछले साल के मुकाबले 17.9% ज्यादा है. रिपोर्ट के अनुसार, मार्च तक 90 दिन के लिए लिया जाने वाला कर्ज सालाना आधार पर 1.1% रहा, जो दिसंबर 2022 में 2% था.
औसत कर्ज
रिपोर्ट की मानें, बिहार में जितना कर्ज लिया गया उसके हिसाब से राज्य के हर कर्जदार ने औसतन 27,200 रुपये का कर्ज लिया. वहीं, तमिलनाडु में ये आंकड़ा 26,600 रुपये बैठता है.
MFI लोन देने में NBFC सबसे आगे
रिपोर्ट की मानें तो MFI लोन सबसे ज्यादा नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFC) ने दिया जो कुल लोन का 37.3% रहा. वहीं, बैंकों ने 33.1% और स्मॉल फाइनेंस बैंक ने 16.66% लोन दिया.