पर्सनल लोन मिलना आसान है, लेकिन क्या वाकई आपको इसे लेना चाहिए?

अगर आप पर्सनल लोन लेना चाह रहे हैं, तो आपको किन चीजों का ख्याल रखना चाहिए.

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हाल के दिनों में पर्सनल लोन सेगमेंट में शानदार बढ़ोतरी देखने को मिली है. चूंकि ये लोन दूसरे लोन के मुकाबले मिलना बहुत आसान है और इस पर कोई सिक्योरिटी नहीं देनी होती, इसलिए ऐसे लोन में काफी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है.

इसलिए लोगों ने इसे धड़ल्ले से लिया है. लेकिन इस तेजी ने ऐसे हालात पैदा कर दिए हैं जहां ज्यादातर लोग तनाव में आ रहे हैं, क्योंकि वो इस कर्ज का बोझ नहीं उठा पा रहे हैं. कर्ज देने वाली संस्थाएं भी अब इन लोन पर चेतावनी की घंटी बजा रही हैं.

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सच में आपको पर्सनल लोन की जरूरत है. और अगर आप पर्सनल लोन लेना चाह भी रहे हैं, तो आपको किन चीजों का ख्याल रखना चाहिए.

जब हो हद से ज्यादा जरूरत

सबसे पहली बात, जब भी पर्सनल लोन लेने के बारे में सोचें, तो सबसे पहले ये तय करें कि क्या वाकई उसकी जरूरत है. पर्सनल लोन आसानी से मिल जाता है, इसका मतलब ये नहीं कि उसे लिया ही जाए और अपने पर्सनल फाइनेंस पर कर्ज का बोझ लाद दिया जाए. ऐसे में इस किस्म के लोन को तभी लेना चाहिए जब आपको पैसों की सख्त जरूरत हो और आपके पास लोन लेने के अलावा कोई दूसरा जरिया न हो. ऐसे में ये लोन आपका अंतिम विकल्प होना चाहिए, जब आपको पैसों की जरूरत हो.

वास्तविकता में, लोग घूमने या इसके जैसे दूसरे खर्चों को बहुत जरूरी मान लेते हैं और इनके लिए पैसों की सेविंग करने के बजाय लोन लेना ज्यादा बेहतर समझते हैं. सबसे शुरुआती दौर में ही ऐसा करने से कई स्थितियां पैदा हो सकती हैं, जहां वास्तव में लोन लेने की जरूरत नहीं होती है और इसे टाला जा सकता है.

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कर्ज चुकाने के लिए प्लानिंग

अगर आपने लोन ले भी लिया है, तो आपके पास इसे चुकाने के लिए एक निश्चित प्लान और समय होना चाहिए.

इसकी प्लानिंग बहुत जरूरी है, ताकि आपके मन में ये बात रहे कि इस कर्ज को चुकाने के लिए पैसा कहां से लाना है. इसमें आपको समय का भी ध्यान रखना होता है कि कितने वक्त में आप ये लोन चुकता कर देंगे. आपके द्वारा इसकी प्लानिंग इसलिए नहीं होनी चाहिए कि ऐसा कहा गया है, बल्कि आपके अंदर एक आत्मविश्वास भी आना चाहिए कि आप लिए हुए लोन को समय रहते चुका देंगे.

ब्याज दरें

लोन लेने के समय ब्याज दरों का खास ख्याल रखें, क्योंकि ये उन मूलभूत फैक्टर में से है, जो आपका प्लान बना और बिगाड़ सकता है.

चूंकि इन लोन पर कोई सिक्योरिटी नहीं होती, इसलिए ब्याज दरें काफी ज्यादा होती हैं. अलग-अलग लोग के लिए भी ये दरें अलग-अलग होती हैं. लोन लेने के दौरान उधार ली गई रकम और ब्याज दर को अच्छी तरह समझ लें, ताकि भविष्य में आपको कितना पैसा लौटाना है, इसकी जानकारी रहे. ब्याज दरें जितनी कम होंगी, उतना ही बेहतर होगा, और आपके लिए इस रकम को चुकाना उतना ही आसान होगा.

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वित्तीय दबाव

पर्सनल लोन लेने के मामले में 2 और प्रमुख बातें हैं, जिनका खास ख्याल रखना चाहिए.

पहला तो ये कि सिक्योर्ड लोन और अनसिक्योर्ड लोन के बीच में बैलेंस होना जरूरी है. चूंकि लोन अनसिक्योर्ड हैं, इसलिए बहुत ज्यादा लोन नहीं लेना चाहिए. इससे एक दूसरी दिक्कत पैदा होती है कि एक साथ लिए गए कर्ज पर भुगतान की जाने वाली मासिक किस्त सस्ती होनी चाहिए. इसलिए आपको सभी पेमेंट को मिलाकर सोचना चाहिए, न कि केवल एक पेमेंट के बारे में.

इससे पर्सनल लोन लेने की सूरत में आपको अंदाजा होगा कि आपको घर की जरूरतें पूरी करने के लिए कितना लोन लेना चाहिए ताकि आगे चलकर घर का बजट न बिगड़े.

इस आर्टिकल के लेखक अर्णव पंड्या Moneyeduschool के फाउंडर हैं