अगर कोई आम निवेशक इक्विटी मार्केट (Equity Market) की बारीकियों में पड़े बिना बेहतर रिटर्न हासिल करना चाहे, तो उसके सामने क्या विकल्प है? ऐसे निवेशकों को आम तौर पर इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड्स में निवेश करने को कहा जाता है. अगर निवेशक इस सलाह पर अमल करने का मन बना ले, तो अगला सवाल ये आता है कि उसे किस म्यूचुअल फंड में पैसे लगाने चाहिए? बाजार में मौजूद अलग-अलग नामों और खूबियों वाले म्यूचुअल फंड्स में से उसके लिए कौन सा फंड सबसे सही है, इसका चुनाव करना कई बार आसान नहीं होता. इस उलझन में फंसे निवेशकों के लिए इंडेक्स फंड में पैसे लगाना एक आसान विकल्प हो सकता है.
इंडेक्स फंड क्या है?
इंडेक्स फंड (Index Fund) का मतलब है ऐसा म्यूचुअल फंड, जिसमें सारा निवेश किसी खास इंडेक्स के शेयरों में किया जाता है. मिसाल के तौर पर अगर आप निफ्टी 50 से जुड़े किसी इंडेक्स फंड में निवेश करते हैं, तो आपका पैसा उन कंपनियों के शेयरों में ही लगाया जाता है, जो निफ्टी 50 इंडेक्स में शामिल हैं. इतना ही नहीं, हर कंपनी में निवेश का रेश्यो भी उतना ही रखा जाता है, जितना इंडेक्स में उस कंपनी का वेटेज होता है. उदाहरण के लिए, निफ्टी 50 में TCS का मौजूदा वेटेज अगर 4% है, तो इस इंडेक्स से जुड़े फंड में 1 लाख रुपये लगाने आपके 4 हजार रुपये TCS में निवेश किए जाएंगे. बाकी रकम इंडेक्स में दूसरी कंपनियों के वेटेज के अनुपात में लगाई जाएगी. यही वजह है कि इंडेक्स फंड को पैसिव फंड भी कहा जाता है.
कम एक्सपेंस रेश्यो
निवेश का फॉर्मूला पहले से तय होने के कारण इंडेक्स फंड में निवेश के फैसले करने के लिए फंड मैनेजर को महंगी फीस या कमीशन देने की जरूरत नहीं पड़ती. ये फीस या कमीशन म्यूचुअल फंड कंपनियां अपने खर्च में जोड़कर निवेशकों से वसूलती हैं. इस खर्च को एक्सपेंस रेश्यो कहते हैं, जो हर फंड के लिए अलग-अलग होता है. यानी फंड मैनेजर पर होने वाले खर्च में बचत का मतलब ये हुआ कि इंडेक्स फंड्स का एक्सपेंस रेश्यो बाकी फंड्स के मुकाबले काफी कम होता है और कम खर्च यानी आपके निवेश पर ज्यादा नेट रिटर्न. आम तौर पर एक्टिव फंड्स म्युचुअल फंड्स में एक्सपेंस रेश्यो अगर 2% तक होता है, तो इंडेक्स फंड्स में ये खर्च सामान्य तौर पर 0.5% से 1% के बीच ही रहता है.
इंडेक्स फंड में कितना मिलता है रिटर्न
किसी इंडेक्स फंड में निवेश किए गए पैसे चूंकि उन्हीं कंपनियों में और उसी रेश्यो में लगाए जाते हैं, जो उस इंडेक्स में शामिल हैं, लिहाजा उस पर रिटर्न भी उसी हिसाब से मिलता है. यानी निफ्टी 50 को ट्रैक करने वाले इंडेक्स फंड में निवेश करने पर आपके फंड का रिटर्न भी निफ्टी 50 के साथ-साथ घटता बढ़ता रहेगा.
इसका मतलब ये भी है कि आप उस इंडेक्स की चाल पर नजर रखकर इंडेक्स फंड में लगे अपने निवेश के रिटर्न को बड़ी आसानी से ट्रैक कर सकते हैं. भारतीय शेयर बाजार के निफ्टी 50 और सेंसेक्स जैसे प्रमुख इंडेक्स लंबी अवधि में लगातार आगे ही बढ़ते रहे हैं. इससे जाहिर है कि उन्हें ट्रैक करने वाले इंडेक्स फंड्स ने भी लंबी अवधि के दौरान अच्छा रिटर्न ही दिया है. देश के कुछ प्रमुख इंडेक्स फंड्स के पिछले लॉन्ग टर्म रिटर्न पर नजर डालने से ये बात और भी साफ हो जाएगी.
इन सभी फंड्स के नाम से जाहिर है कि ये किस इंडेक्स को ट्रैक करते हैं. ऊपर दिए आंकड़ों में आप ये भी देखेंगे कि एक ही इंडेक्स को ट्रैक करने वाले अलग-अलग इंडेक्स फंड्स के रिटर्न में थोड़ा-बहुत अंतर है. ये फर्क ट्रैकिंग एरर की वजह से होता है, जो आम तौर पर बेहद मामूली होता है.
इंडेक्स फंड में निवेश पर टैक्स बेनिफिट
इंडेक्स फंड के जरिए इक्विटी में निवेश किया जाता है, इसलिए इन्हें इक्विटी फंड की कैटेगरी में रखा जाता है. लिहाजा, इसमें निवेश करने पर वे सभी टैक्स लाभ मिलते हैं, जो इक्विटी फंड्स पर लागू होते हैं. इसमें इनवेस्ट किए गए पैसों को 12 महीने से कम समय में निकालने पर आपको जो मुनाफा होगा, उस पर 15% के रेट से शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) टैक्स देना होता है. लेकिन अगर आप इंडेक्स फंड की यूनिट्स को 12 महीने से ज्यादा समय तक रखने के बाद पैसे वापस निकालते हैं, तो साल में 1 लाख रुपये तक के मुनाफे पर कोई टैक्स नहीं लगता. एक वित्त वर्ष के दौरान 1 लाख रुपये से ज्यादा मुनाफा होने पर 10% के हिसाब से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स देना होगा.
इंडेक्स फंड में किसे लगाने चाहिए पैसे
इंडेक्स फंड उन लोगों के लिए इनवेस्टमेंट का सही विकल्प हो सकता है, जो शेयर बाजार के झमेलों में पड़े बिना अच्छा मुनाफा हासिल करना चाहते हैं और इक्विटी में निवेश से जुड़ा जोखिम उठाने को तैयार हैं. इंडेक्स में शामिल सभी कंपनियों में निवेश के कारण इंडेक्स फंड में निवेश डायवर्सिफाइड होता है, जिससे रिस्क कम हो जाता है. फिर भी ये बात हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए कि इक्विटी में किए गए किसी भी निवेश में रिटर्न की गारंटी नहीं होती और उसमें कुछ न कुछ जोखिम तो रहता ही है.
आपको किस इंडेक्स फंड में पैसे डालने हैं, इसका फैसला आप अपने निवेश के लक्ष्य और जोखिम उठाने की क्षमता के आधार पर कर सकते हैं. निफ्टी 50 या सेंसेक्स को ट्रैक करने वाले इंडेक्स फंड बाजार की शीर्ष 50 या 30 कंपनियों में निवेश करते हैं, लिहाजा उनमें रिस्क कम होता है. लेकिन अगर कोई निवेशक ज्यादा रिटर्न पाने के लिए कुछ अधिक रिस्क लेने को तैयार है, तो वो मिडकैप या निफ्टी नेक्स्ट 50 जैसे इंडेक्स में निवेश करने पर भी विचार कर सकता है.