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इंडसइंड बैंक ने अकाउंटिंग गड़बड़ियों की जांच के लिए PwC को नियुक्त किया, शेयर 22% से ज्यादा टूटा

इंडसइंड बैंक को अक्टूबर के महीने में जैसे ही इस गड़बड़ी का पता चला, इसने एक इंटरनल रिव्यू की शुरुआत की और समीक्षा की एक्सटर्नल वेरिफिकेशन के लिए PwC को नियुक्त किया.
NDTV Profit हिंदीविश्वनाथ नायर
NDTV Profit हिंदी10:53 AM IST, 11 Mar 2025NDTV Profit हिंदी
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इंडसइंड बैंक (IndusInd Bank) ने अपनी ट्रेजरी बुक में मिली अकाउंटिंग की गड़बड़ियों की एक्सटर्नल जांच के लिए कंसल्टिंग फर्म PwC को नियुक्त किया है. इस मामले की सीधी जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति के मुताबिक PwC इस मामले पर अपनी रिपोर्ट दो से तीन हफ्ते में सौंप सकती है.

गड़बड़ियां और उसका वित्तीय प्रभाव

सोमवार शाम को इंडसइंड बैंक ने एक्सचेंजों को सूचित किया कि उसे अपने डेरिवेटिव पोर्टफोलियो में अकाउंटिंग गबड़बड़ियां मिली हैं, जिसका उसके नेटवर्थ पर 2.35% असर हो सकता है. इसका मतलब है कि बैंक को 1,500-2,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा. मामले की जानकारी रखने वाले इस व्यक्ति के मुताबिक अक्टूबर 2024 के करीब बैंक को ये पता चला कि उसके डेरिवेटिव पोर्टफोलियो में एक गैप था.

ये पिछले पांच से सात वर्षों में बैंक की ओर से किए गए इंटरनल ट्रेड्स से जुड़ा हुआ है. मामले की जानकारी रखने वाले इस व्यक्ति ने बताया कि बैंक बहुत बड़ी ट्रेजरी बुक को ऑपरेट करता है, जो गड़बड़ी हुई है, वो इसके मुकाबले काफी छोटे साइज की है.

इंडसइंड बैंक को अक्टूबर के महीने में जैसे ही इस गड़बड़ी का पता चला, इसने एक इंटरनल रिव्यू की शुरुआत की और समीक्षा की एक्सटर्नल वेरिफिकेशन के लिए PwC को नियुक्त किया. अब चूंकि बैंक खुद ही इस डेटा की जांच और मिलान कर रहा था, इसलिए इसमें टाइम लगा, इस व्यक्ति ने बताया कि बैंक अब गड़बड़ियों का असली कारण और वित्तीय प्रभाव का पता लगाने में सक्षम है.

इंडसइंड बैंक ने अपनी तीसरी तिमाही के डिस्क्लोजर में कहा कि डेरिवेटिव, फॉरेन एक्सचेंज कॉन्ट्रैक्ट्स और ऑप्शंस की अनुमानित वैल्यू 15 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है. ये 31 दिसंबर तक 17,022 करोड़ रुपये के रिस्क वेटेज एसेट्स के मुकाबले था.

इंडसइंड बैंक का शेयर 22% टूटा

मंगलवार को इंडसइंड बैंक का शेयर शुरुआती कारोबार के दौरान ही 20% से ज्यादा टूटकर 720.35 रुपये पर आ गया. जिसकी वजह से इंडसइंड बैंक के मार्केट कैप में 14,000 की गिरावट आई. फिलहाल 10:45 बजे तक स्टॉक 22% से ज्यादा टूट चुका था और इसने 696.65 का सबसे निचला स्तर भी बनाया है.

इंडसइंड बैंक का शेयर निफ्टी 50 में टॉप लूजर था, इसमें नवंबर 2020 के बाद सबसे बड़ी गिरावट आई है. सोमवार को इंडसइंड बैंक में 3.7% की गिरावट आई थी. ये शेयर बीते 12 महीने में 42% से ज्यादा टूट चुका है, YTD पर इसमें 5.6% की गिरावट है.

आखिर हुआ क्या था, समझिए पूरी कहानी

सोमवार को बैंक ने अपने नतीजों पर चर्चा करने के लिए आनन-फानन में एक एनालिस्ट कॉल बुलाई. कॉल पर इंडसइंड बैंक के MD और CEO सुमंत कठपालिया ने बताया कि ये मुद्दा बैंक की ओर से अपने डेरिवेटिव पोर्टफोलियो में किए गए 'इंटरनल ट्रेड' का एक सेट था.

अपने बिजनेस के हिस्से के तौर पर बैंक नियमित रूप से विदेशी मुद्रा फंड उधार लेता है. अपनी बैलेंस शीट की सुरक्षा के लिए, लॉन्ग टर्म फॉरेन करेंसी उधार में इंटरनल ट्रेड किया जाता है.

कुछ ट्रांजैक्शन जैसे कि तीन से पांच साल के लिए येन बॉरोइंग या मल्टीलैटरल फंड्स से 8 से 10 वर्ष के लिए डॉलर बॉरोइंग को आमतौर पर बैलेंस शीट में रखने के लिए रुपये में बदल दिया जाता है.

इस तरह की स्वैपिंग में दो तरह के ट्रांजैक्शन शामिल होते हैं. पहला, इंटरनल, जिसमें बैंक को एक तय लागत पर करेंसी स्वैपिंग करनी होती है. दूसरा, या ट्रांजैक्शन के एक्सटर्नल चरण में, ट्रेडिंग डेस्क मार्क-टू-मार्केट रेट्स पर फॉरेन करेंसी स्वैप को हेज करता है.

कठपालिया ने एनालिस्ट्स को बताया कि आमतौर पर, कॉन्ट्रैक्ट्स की अवधि के दौरान, स्वैपिंग लागत और हेजिंग लागत अलग-अलग होती है, लेकिन आखिर में कॉन्ट्रैक्ट के मैच्योर होने पर ये लागतें एक समान हो जाती हैं. हालांकि मुद्दा ये था कि 1 अप्रैल, 2024 से रिजर्व बैंक ने बैंकों को इंटरनल डेरिवेटिव ट्रेड करने से रोक दिया था.

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