इंडसइंड बैंक और उसके जमाकर्ताओं के पैसे पूरी तरह सुरक्षित हैं. इंडसइंड बैंक के ग्राहकों और जमाकर्ताओं की चिंता को दूर करते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि इंडसइंड बैंक के जमाकर्ताओं को घबराने की आवश्यकता नहीं है.
"इस समय जमाकर्ताओं को अटकलों पर ध्यान देने की कोई जरूरत नहीं है. बैंक की वित्तीय स्थिति स्थिर बनी हुई है और रिजर्व बैंक इस पर कड़ी निगरानी रख रहा है." RBI ने इस स्पष्टीकरण को अपनी वेबसाइट पर भी डाला है ताकि लोगों के मन से बैंक को लेकर सारी शंकाएं दूर हो जाएं.
RBI ने कहा कि इंडसइंड बैंक के पास पर्याप्त पूंजी है और इसकी वित्तीय स्थिति संतोषजनक बनी हुई है
RBI के अनुसार 31 दिसंबर, 2024 को खत्म तिमाही तक ऑडिटर की समीक्षा के हिसाब से बैंक के नतीजे और उसकी बैलेंस शीट मजबूत है. ऑडिट समीक्षा के अनुसार बैंक ने 16.46% का कैपिटल एडिक्वेसी रेश्यो और 70.20% का प्रोविजन कवरेज रेश्यो बनाए रखा है. यही नहीं 9 मार्च, 2025 तक बैंक की LCR यानी लिक्विडिटी कवरेज रेश्यो भी 113% था, जबकि नियमों के हिसाब से ये 100% होनी चाहिए.
RBI का ये स्पष्टीकरण इंडसइंड बैंक के अकाउंटिंग में गड़बड़ी का खुलासा करने के कुछ दिनों बाद आया है. इस गड़बड़ी के कारण बैंक को कुछ वित्तीय नुकसान हुआ है, जो 31 दिसंबर, 2024 तक बैंक की कुल संपत्ति के 2.35% के बराबर है. बैंक के अनुसार यह उसके डेरिवेटिव पोर्टफोलियो की समीक्षा के बाद इस गड़बड़ी का पता चला है.
दरअसल 10 मार्च (सोमवार) को इंडसइंड बैंक ने एक आनन-फानन में एनालिस्ट कॉल आयोजित की, जिसमें बैंक के MD और CEO सुमंत कठपालिया ने बताया कि ये मुद्दा बैंक के डेरिवेटिव पोर्टफोलियो में किए गए इंटरनल ट्रेड्स से जुड़ा है. मामला पिछले 5-7 वर्षों में किए गए इंटरनल ट्रेड्स से जुड़ा है. हाल ही में, जब बैंक ने अपने डेरिवेटिव पोर्टफोलियो की समीक्षा की, तब इस गड़बड़ी का पता चला.
बैंक फॉरेन करेंसी में लोन लेकर अपनी बैलेंस शीट को सुरक्षित करने के लिए स्वैपिंग करता रहा है. इसमें दो तरह के ट्रांजैक्शन होते हैं—इंटरनल ट्रेड और एक्सटर्नल हेजिंग. लेकिन RBI ने 1 अप्रैल 2024 से बैंकों को इंटरनल डेरिवेटिव ट्रेड करने से रोक दिया था, जिससे ये मामला विवादों में आ गया.
RBI ने कहा, "पब्लिक डोमेन में उपलब्ध खुलासों के आधार पर, बैंक ने पहले ही अपने मौजूदा सिस्टम की व्यापक समीक्षा करने और वास्तविक प्रभाव का आकलन करने और उसका हिसाब लगाने के लिए एक बाहरी ऑडिट टीम की नियुक्ति कर ली है." RBI ने बोर्ड और मैनेजमेंट को चौथी तिमाही में सुधारात्मक कार्रवाई पूरा करने का निर्देश दिया है.
आधुनिक भारत ने कभी भी किसी शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंक को बंद होते नहीं देखा है. RBI के पास बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट के तहत जमाकर्ता पर किसी भी तरह के तनाव होने की स्थिति में तुरंत कार्रवाई करने की शक्ति है.
ऐसी स्थिति में जब RBI को लगता है कि कोई बैंक वित्तीय रूप से सक्षम नहीं है, तो RBI आमतौर पर ये सुनिश्चित करता है कि रेस्क्यू प्लान को लागू किया जाए और सभी डिपॉजिटर्स के हितों की रक्षा की जाए. बैंकिंग रेगुलेटर ने 2019 में लक्ष्मी विलास बैंक को बचाने के समय और फिर 2020 में यस बैंक को बचाने के दौरान भी ऐसा ही किया था. इन बैंकों के किसी भी डिपॉजिटर को अपनी जमा राशि में किसी तरह की कमी का सामना नहीं करना पड़ा था.
इंडसइंड बैंक की वित्तीय स्थिति उस स्तर के करीब नहीं है, जहां RBI को ऐसे किसी सुरक्षात्मक उपाय को लागू करने की जरूरत हो सके. इसिलिए चिंता की बात नहीं है.