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Induslnd Bank Update: इंडसइंड बैंक में आपके डिपॉजिट को नहीं है कोई खतरा, जानें पूरी डिटेल

इंडसइंड बैंक में पाई गई वित्तीय गड़बड़ियां बड़ी हैं, लेकिन इसका बैंक की वित्तीय स्थिरता या सॉल्वेंसी पर कोई वास्तविक असर नहीं है.
NDTV Profit हिंदीविश्वनाथ नायर
NDTV Profit हिंदी12:08 PM IST, 15 Mar 2025NDTV Profit हिंदी
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बीते पूरा हफ्ता इंडसइंड (IndusInd Bank) के कस्टमर्स के लिए चिंता से भरा बीता. बैंक में सामने आई वित्तीय गड़बड़ियों के चलते कस्टमर्स को बैंक में अपने डिपॉजिट्स के भविष्य को लेकर चिंता बनी हुई है. लेकिन आज जान लेते हैं कि इंडसइंड बैंक के डेरिवेटिव पोर्टफोलियो में गड़बड़ी से आपकी जमापूंजी यानी क्या डिपॉजिट्स पर असर पड़ेगा?

क्या है पूरा मामला?

10 मार्च (सोमवार) को इंडसइंड बैंक ने एक आनन-फानन में एनालिस्ट कॉल आयोजित की, जिसमें बैंक के MD और CEO सुमंत कठपालिया ने बताया कि ये मुद्दा बैंक के डेरिवेटिव पोर्टफोलियो में किए गए इंटरनल ट्रेड्स से जुड़ा है. मामला पिछले 5-7 वर्षों में किए गए इंटरनल ट्रेड्स से जुड़ा है. हाल ही में, जब बैंक ने अपने डेरिवेटिव पोर्टफोलियो की समीक्षा की, तब इस गड़बड़ी का पता चला.

बैंक फॉरेन करेंसी में लोन लेकर अपनी बैलेंस शीट को सुरक्षित करने के लिए स्वैपिंग करता रहा है. इसमें दो तरह के ट्रांजैक्शन होते हैं—इंटरनल ट्रेड और एक्सटर्नल हेजिंग. लेकिन RBI ने 1 अप्रैल 2024 से बैंकों को इंटरनल डेरिवेटिव ट्रेड करने से रोक दिया था, जिससे ये मामला विवादों में आ गया.

इंडसइंड बैंक ने स्टॉक एक्सचेंज को जानकारी दी है कि इस गड़बड़ी से नेटवर्थ पर 2.35% तक असर पड़ सकता है, जिसका मतलब है कि बैंक को 1,500-2,000 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ सकता है.

बैंक ने ये भी बताया कि 31 दिसंबर 2023 तक उसके डेरिवेटिव, फॉरेन एक्सचेंज कॉन्ट्रैक्ट्स और ऑप्शंस की अनुमानित वैल्यू 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक थी. ऐसे में ये मामला पूरे बैंकिंग सेक्टर के लिए एक बड़ा अलर्ट बन गया है.

इस बात पर भी सवाल उठ रहे हैं कि MD और CEO सुमंत कठपालिया और डिप्टी CEO अरुण खुराना ने इस गैप के सार्वजनिक होने से महीनों पहले ही अपनी लगभग 80% शेयरहोल्डिंग बाजार में क्यों बेच दी? ये शेयर कुछ साल पहले ESOP कार्यक्रम के तहत दोनों को आवंटित किए गए थे. शेयर 1,524 रुपये/शेयर के आसपास की कीमतों पर बेचे गए थे, जब कीमतें अपने 52 वीक हाई के करीब थीं. तब से शेयर की कीमतों में काफी गिरावट देखने को मिली है.

बैंक में डिपॉजिट्स का क्या होगा?

इंडसइंड बैंक में पाई गई वित्तीय गड़बड़ियां बड़ी हैं, लेकिन इसका बैंक की वित्तीय स्थिरता या सॉल्वेंसी पर कोई वास्तविक असर नहीं है.

एक लेंडर के रूप में, 31 दिसंबर तक इंडसइंड बैंक की बकाया जमाराशि 4.09 लाख करोड़ रुपये थी, जब्कि बैंक द्वारा दिए गए बकाया लोन 3.66 लाख करोड़ रुपये थे.

बैंक के नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स या बैड लोन रेश्यो कुल लोन का 2.25% था. वैसे तो ये आंकड़ा भी बड़ा है, लेकिन ये डिपॉजिटर्स को चिंता करने के लिए जरूरी स्तर से बहुत नीचे है.

31 दिसंबर तक बैंक के लिए कैपिटल एडिक्वेसी रेश्यो (CAR) 16.46% था. कैपिटल रेश्यो बैंक की वित्तीय तनाव को झेलने और अपने भविष्य के फंड्स देने की क्षमता को दर्शाता है. ये रेगुलेटरी मिनिमम 11.5% से भी बहुत ज्यादा है.

आधुनिक भारत ने कभी भी किसी शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंक को बंद होते नहीं देखा है. RBI के पास बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट के तहत जमाकर्ता पर किसी भी तरह के तनाव होने की स्थिति में तुरंत कार्रवाई करने की शक्ति है.

ऐसी स्थिति में जब RBI को लगता है कि कोई बैंक वित्तीय रूप से सक्षम नहीं है, तो RBI आमतौर पर ये सुनिश्चित करता है कि रेस्क्यू प्लान को लागू किया जाए और सभी डिपॉजिटर्स के हितों की रक्षा की जाए. बैंकिंग रेगुलेटर ने 2019 में लक्ष्मी विलास बैंक को बचाने के समय और फिर 2020 में यस बैंक को बचाने के दौरान भी ऐसा ही किया था. इन बैंकों के किसी भी डिपॉजिटर को अपनी जमा राशि में किसी तरह की कमी का सामना नहीं करना पड़ा था.

इंडसइंड बैंक की वित्तीय स्थिति उस स्तर के करीब नहीं है, जहां RBI को ऐसे किसी सुरक्षात्मक उपाय को लागू करने की जरूरत हो सके. इसिलिए चिंता की बात नहीं है.

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