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अदाणी का 120 करोड़ डॉलर का कॉपर प्लांट मेटल इंपोर्ट पर देश निर्भरता करेगा कम

इस पहल के साथ भारत अब उन चंद देशों में शामिल हो गया है जो तेजी से कॉपर के उत्पादन को बढ़ाने में लगे हुए हैं
NDTV Profit हिंदीमोहम्मद हामिद
NDTV Profit हिंदी12:02 PM IST, 05 Feb 2024NDTV Profit हिंदी
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अदाणी ग्रुप (Adani group) गुजरात के मुंद्रा में दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल लोकेशन कॉपर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट (single-location copper manufacturing plant) बनाने जा रहा है. इस प्लांट के बनने के बाद भारत की कॉपर को लेकर दूसरे देशों पर निर्भरता में कमी आएगी और एनर्जी ट्रांजिशन में भी इससे मदद मिलेगी.

प्लांट का पहला चरण मार्च से शुरू होगा

PTI में छपी खबरे के मुताबिक - कच्छ कॉपर लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर विनय प्रकाश ने कहा कि 120 करोड़ डॉलर के इस प्लांट का पहला चरण मार्च अंत तक काम करना शुरू कर देगा, पूरी तरह से 10 लाख टन की क्षमता के साथ FY29 में ये कामकाज करना शुरू कर देगा.

इस पहल के साथ भारत अब उन चंद देशों में शामिल हो गया है जो तेजी से कॉपर के उत्पादन को बढ़ाने में लगे हुए हैं, जो फॉसिल फ्यूल से निजात पाने में बहुत जरूरी धातु है. क्योंकि एनर्जी ट्रांजिशन में जरूरी टेक्नोलॉजी जैसे कि इलेक्ट्रिक व्हीकल, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, सोलर फोटोवोल्टिक्स (PV), विंड और बैटरी इन सभी में कॉपर की जरूरत होती है.

अदाणी एंटरप्राइजेज की सब्सिडियरी कंपनी कच्छ कॉपर लिमिटेड (KCL) दो चरणों में 10 लाख टन प्रति वर्ष क्षमता के साथ रिफाइंड कॉपर के उत्पादन के लिए एक ग्रीनफील्ड कॉपर रिफाइनरी प्रोजेक्ट लगा रही है.

कॉपर बिजनेस में ग्लोबल लीडर बनने की तैयारी

पहले चरण के लिए 5 लाख टन प्रति वर्ष की क्षमता के लिए KCL ने जून 2022 में एक सिंडिकेटेड क्लब लोन के जरिए फाइनेंशियल क्लोजर हासिल किया है. विनय प्रकाश ने कहा, 'रिसोर्स ट्रेडिंग, लॉजिस्टिक्स, रीन्यूएबल एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर में अदाणी ग्रुप की मजबूत स्थिति का फायदा लेकर अदाणी कॉपर के कारोबार में भी ग्लोबल लीडर बनना चाहते हैं'

विनय प्रकाश ने कहा कि 'उनका लक्ष्य 2030 तक दुनिया का सबसे बड़ा कॉपर मेल्टिंग बनना है. भारत में प्रति व्यक्ति तांबे की खपत करीब 600 ग्राम अनुमानित है, जबकि ग्लोबल औसत 3.2 किलोग्राम है'.

स्टील और एल्यूमीनियम के बाद तांबा तीसरी सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली औद्योगिक धातु है, और तेजी से बढ़ते रीन्यूएबल एनर्जी, टेलीकॉम और EV इंडस्ट्री की वजह से इसकी मांग बढ़ रही है. भारत का कॉपर प्रोडक्शन इस बढ़ती मांग को पूरा करने में असमर्थ रहा है, और घरेलू सप्लाई में रुकावटों की वजह से इंपोर्टेड तांबे पर निर्भरता बढ़ गई है. पिछले पांच वर्षों से भारत का इंपोर्ट लगातार बढ़ रहा है.

कॉपर का इंपोर्ट बढ़ा, एक्सपोर्ट घटा

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक - FY23 के लिए, भारत ने रिकॉर्ड 1,81,000 टन तांबे का इंपोर्ट किया, जबकि एक्सपोर्ट घटकर 30,000 टन के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया, जो कि कोविड महामारी अवधि से भी कम है.

एक अनुमान के मुताबिक भारत में FY23 में 7,50,000 टन तांबे की खपत होगी, ग्रीन एनर्जी इंडस्ट्री की भारी मांग के कारण 2027 तक ये आंकड़ा बढ़कर 17 लाख टन होने की उम्मीद है. अकेले सोलर PV इंस्टॉलेशन की ग्लोबल मांग चालू दशक में दोगुनी होकर 22.5 लाख टन होने का अनुमान है. ऐसे में अदाणी ग्रुप, जो तेजी से अपने रीन्यूएबल एनर्जी पोर्टफोलियो को बढ़ा रहा है, कॉपर का एक जरूरी उपभोक्ता होगा.

अदाणी का कॉपर प्लांट ऐसे समय में आया है जब वेदांता तमिलनाडु के तूतीकोरिन में लंबे समय से बंद पड़े 400,000 टन के प्लांट को फिर से खोलने की मांग कर रही है. देश का सबसे बड़ा कॉपर स्मेल्टर इस समय हिंडाल्को इंडस्ट्रीज के पास है, जिसकी क्षमता भी 5 लाख टन है.

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