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ट्रे़ड वॉर से बढ़ती चिंताओं के बीच फिच ने भारत का ग्रोथ अनुमान घटाकर 6.4% किया

फिच ने तिमाही ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक के अपने स्पेशल अपडेट में कहा, 'अमेरिकी ट्रेड पॉलिसी के बारे में किसी भी भरोसे के साथ भविष्यवाणी करना कठिन है.
NDTV Profit हिंदीमोहम्मद हामिद
NDTV Profit हिंदी01:03 PM IST, 17 Apr 2025NDTV Profit हिंदी
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फिच रेटिंग्स ने भारत के लिए ग्रोथ अनुमानों को घटा दिया है. रेटिंग एजेंसी ने मौजूदा वित्त वर्ष के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान 10 बेसिस प्वाइंट घटाकर 6.4% कर दिया है. इसके पीछे फिच ने ग्लोबल ट्रेड वॉर की वजह से बढ़ती हुई चिंताओं का हवाला दिया है.

US ट्रेड पॉलिसी से अनिश्चितता

हालांकि फिच ने अगले वित्त वर्ष के लिए GDP ग्रोथ के अनुमानों में कोई बदलाव नहीं किया है. भारत के बारे में फिच ने वित्त वर्ष 2024-25 और मौजूदा वित्त वर्ष 2025-26 के लिए GDP ग्रोथ अनुमान में 10 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर करके इसे 6.2% और 6.4% कर दिया है और FY2026-27 के लिए ग्रोथ रेट को 6.3% पर ही बरकरार रखा है.

फिच ने तिमाही ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक के अपने स्पेशल अपडेट में कहा, 'अमेरिकी ट्रेड पॉलिसी के बारे में किसी भी भरोसे के साथ भविष्यवाणी करना कठिन है. पॉलिसी में भारी अनिश्चितता व्यापार निवेश की संभावनाओं को नुकसान पहुंचा रही है, इक्विटी की कीमतों में गिरावट घरेलू एसेट्स को कम कर रही है और अमेरिकी एक्सपोर्टर्स को प्रतिशोध का सामना करना पड़ेगा.

फिच ने 2025 के लिए अपने वर्ल्ड ग्रोथ प्रोजेक्शंस यानी वैश्विक विकास अनुमानों को भी 0.4 परसेंटेज प्वाइंट से कम कर दिया, और चीन और अमेरिका के ग्रोथ अनुमानों को अपने मार्च GEO से 0.5 परसेंटेज प्वाइंट घटा दिया है.

ग्लोबल विकास दर अनुमान भी घटाया

फिच रेटिंग्स ने ग्लोबल ट्रेड वॉर में आई तेजी को देखते हुए ग्लोबल ग्रोथ अनुमानों को तेजी से घटाया है. एजेंसी ने कहा कि इस साल दुनिया की विकास दर 2% के नीचे रहने का अनुमान है. महामारी को छोड़कर, ये 2009 के बाद से सबसे कमजोर वैश्विक विकास दर होगी.

अमेरिका की GDP ग्रोथ रेट 2025 के लिए 1.2% पर पॉजिटिव रहने की उम्मीद है. फिच के अनुमानों के मुताबिक, चीन की ग्रोथ रेट इस वर्ष और अगले साल दोनों में 4% से नीचे रहने का अनुमान है. जबकि यूरोजोन में ग्रोथ 1% से काफी नीचे बनी रहेगी. रेटिंग एजेंसी ने अपने नोट में कहा है कि अमेरिका की ओर से लिबरेशन डे पर की गई टैरिफ बढ़ोतरी उम्मीद से कहीं ज्यादा ही खराब थी.

हालांकि बाद में इस पर 90 दिनों की अवधि के लिए रोक लगा दी गई. लेकिन चीन और अमेरिका के बीच लगातार जवाबी कार्रवाई जारी रही और दोनों ने ही एक दूसरे के ऊपर जवाबी टैरिफ लाद दिए जिससे रेसिप्रोकल टैरिफ 100% से भी ज्यादा पहुंच गया.

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