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देश के विकास में प्राइवेट सेक्‍टर को पार्टनर मानती है सरकार, CII समिट में बोलीं वित्त मंत्री सीतारमण

वित्त मंत्री ने भारत की ग्रोथ स्टोरी को साबित करने के लिए IMF की रिपोर्ट्स का हवाला दिया, जिसके मुताबिक, 2023 से 2028 के बीच वैश्विक विकास में भारत का योगदान 18% होगा.
NDTV Profit हिंदीNDTV Profit डेस्क
NDTV Profit हिंदी02:25 PM IST, 17 May 2024NDTV Profit हिंदी
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वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उद्योग जगत से देश के विकास में भागीदार बनने की अपील की है.

शुक्रवार को CII सालाना बिजनेस समिट में उन्होंने कहा, 'हम प्राइवेट सेक्टर की बड़ी भूमिका देखते हैं और देश के विकास के लिए उनके साथ पार्टनरशिप करना चाहते हैं, जिसमें सरकार एक फेसिलिटेटर और इनेबलर की तरह काम करेगी. यानी उन्हें सुविधाएं मुहैया कराएगी और सक्षम बनाएगी.'

देश में लागू आचार संहिता और आगामी पांचवें चरण के मतदान के बीच वित्त मंत्री का ये कमिटमेंट आया है. पांचवें चरण में सोमवार को 6 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों की 49 सीटों पर वोटिंग होनी है.

'भारत की ग्रोथ स्टोरी, आंकड़ों की जुबानी'

वित्त मंत्री के अनुसार, देश का डेमोग्राफिक डिविडेंड 30 साल की अवधि तक बना रहेगा. ये ऐतिहासिक रूप से कम निर्भरता अनुपात (Low Dependency Ratio) के साथ आएगा. सीतारमण ने कहा कि इससे अनिवार्य रूप से नेट कंजप्शन बढ़ेगा.

उन्होंने भारत की ग्रोथ स्टोरी को साबित करने के लिए IMF की रिपोर्ट्स का हवाला दिया, जिनमें अनुमान लगाया गया है कि 2023 से अगले पांच वर्षों (2023-28 के बीच) के लिए वैश्विक विकास में भारत का योगदान 18% होगा.

उन्होंने भारतीय कंज्यूमर मार्केट पर S&P रिपोर्ट का भी जिक्र किया, जिसके मुताबिक देश का कंज्यूमर मार्केट 2031 तक दोगुना होकर 2.9 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. इसमें केवल खाद्य पदार्थों पर खर्च की हिस्सेदारी 1.4 ट्रिलियन डॉलर तक हो सकती है.

ग्‍लोबल वैल्‍यू चेन में बढ़ानी होगी हिस्‍सेदारी

निर्मला सीतारमण ने कहा, 'मैन्युफैक्चरिंग के मोर्चे पर दुनिया अपने संसाधनों के पूल में विविधता लाने की कोशिश कर रही है. ऐसे में ग्लोबल वैल्यू चेन में भारत की हिस्सेदारी बढ़नी चाहिए.'

उन्होंने कहा, 'पॉलिसीज के जरिए भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग वैल्यू चेन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ानी चाहिए. हमें बेहतर क्वालिटी के प्रोडक्ट मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस करने की जरूरत है और हमें ये देखने की जरूरत है कि पॉलिसी के जरिये इसे कैसे सपोर्ट किया जा सकता है.'

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