मीता कार देश के भीतर हर महीने कम से कम दो बार यात्राएं करती हैं. इस दौरान वे 4-स्टार होटल्स में रुकती हैं, जिसका खर्च कंपनी देती है. लेकिन तमाम थकावट के बावजूद वे खाना होटल के बार से ऑर्डर करती हैं.
वे कहती हैं, 'जब हम एक प्लेट बिरयानी महज एक किलोमीटर दूर से किसी और रेस्टोरेंट से मंगवा सकते हैं, तो उसके लिए हम 18% GST क्यों चुकाएं.'
आज जब सेक्टर महामारी के प्रभाव से उबर ही रहा है, तब GST स्ट्रक्चर में इस तरह का अंतर स्टे होटल्स के रेस्टोरेटं और स्टैंडअलोन रेस्टोरेंट में बड़ा फर्क बना रहा है.
स्टैंडअलोन रेस्टोरेंट पर 5% GST चार्ज किया जाता है, जबकि होटल के रेस्टोरेंट में खाने पर सीधे 18% का GST लिया जाता है, बशर्ते रूम टैरिफ 7,500 रुपये से ज्यादा हो. ये GST चार्ज उन गेस्ट पर भी लगाया जाता है, जो होटल में स्टे भी नहीं कर रहे हैं.
फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट प्रदीप शेट्टी कहते हैं, 'मौजूदा सिस्टम जहां रेस्टोरेंट के लिए GST रेट होटल के कमरों से जुड़े हुए हैं, वो अन्यायपूर्ण, अनिश्चित्ता और घाटा कराने वाला है.'
वे आगे कहते हैं, 'होटल के रेस्टोरेंट में 18% GST का परसेप्शन ग्राहकों के मन में है, जिससे वे हतोत्साहित होते हैं, भले ही होटल के रेस्टोरेंट में दूसरे स्टैंडअलोन रेस्टोरेंट की तुलना में मेन्यू आइटम्स सस्ते हों.'
सायाजी होटल्स के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर संदेश खंडेलवाल कहते हैं, 'थाईलैंड, मलेशिया और सिंगापुर जैसे दूसरे एशियाई देशों में टैक्स की दर कम है, इसलिए भारत को ग्लोबल स्केल पर कंपटीशन में आगे आने के लिए GST रेट में बदलाव पर सोचना होगा.'
फ्रैनकॉर्प एंड रेस्टोरेंट इंडिया द्वारा बनाई गई फूड सर्विसेज एंड रेस्टोरेंट बिजनेस रिपोर्ट 2022-23 के मुताबिक, भारत में होटल्स और रेस्टोरेंट, भारतीय फूड सर्विस मार्केट में अहम किरदार अदा करने वाले हैं, जो 2028 तक 79.7 बिलियन डॉलर का होने वाला है. ये सालाना आधार पर 11.19% की रफ्तार से बढ़ रहा है.