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दाल के जमाखोर, प्याज से सीखें सबक! अब कारोबारियों को रुला रहा है प्याज

जब प्याज की कीमतें आसमान चढ़ी थीं, तो इसे काबू में करने के लिए मिस्र, तुर्की और कई अन्य देशों से प्याज आयात किया गया। अब मंडी में देसी प्याज आने लगा है, जो सस्ता है और इनसे अच्छा भी। ऐसे में हजारों टन विदेशी प्याज के खरीदार ढूंढने से भी नहीं मिल रहे।
NDTV Profit हिंदीAnurag Dwary
NDTV Profit हिंदी04:52 PM IST, 25 Oct 2015NDTV Profit हिंदी
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दाल के जमाखोर प्याज से सबक ले सकते हैं। एशिया की सबसे बड़ी थोक मंडी, नवी मुंबई के वाशी स्थित एपीएमसी मार्केट में विदेश से आया हजारों टन प्याज सड़ रहा है, इसका खरीदार अब कोई नहीं है। बड़ी वजह है देसी बाजार से आया सस्ता और अच्छा प्याज और दूसरा शायद कारोबारियों का लालच, जिन्होंने अच्छी कीमतों के चक्कर में स्टॉक को कुछ ज्यादा दिनों तक ही रखनी की सोची।

जब प्याज की कीमतें आसमान चढ़ी थीं, तो इसे काबू में करने के लिए मिस्र, तुर्की और कई अन्य देशों से प्याज आयात किया गया। अब मंडी में देसी प्याज आने लगा है, जो सस्ता है और इनसे अच्छा भी। ऐसे में हजारों टन विदेशी प्याज के खरीदार ढूंढने से भी नहीं मिल रहे।

वाशी थोक मंडी में प्याज के कारोबारी मनोहर तोतलानी का कहना है, "हमारा कई टन प्याज सड़ गया, जिसे हमें फेंकना पड़ा है। मार्केट में कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र से प्याज आ रहा है, जो लोगों को खाने में ज्यादा अच्छा लगता है, इनका साइज भी विदेशी प्याज से छोटा है, जिसे लोग ज्यादा पसंद करते हैं।"

आलम ये है कि 40-45 रुपये बिकने वाले विदेशी प्याज को अब 22-35 रुपये प्रति किलो में भी खरीदार नहीं मिल रहे। पिछले हफ्ते ही कारोबारियों को कई टन प्याज फेंकना पड़ा था, लेकिन उनके पास नया स्टॉक फिर आ गया है, क्योंकि बुकिंग पहले ही हो गई थी।

अगस्त के महीने में जेएनपीटी बंदरगाह में प्याज से लदे कंटनेर आए थे, लेकिन जानकारों के मुताबिक एसी कंटेनर में आया प्याज मौसम की मार नहीं झेल पा रहा है, ऊपर से ज्यादा दिन तक प्याज को बचाकर रखने की कारोबारियों की लालच भी उनके नुकसान की बड़ी वजह बना।

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लेखकAnurag Dwary
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