ADVERTISEMENT

SEBI म्यूचुअल फंड और PMS के बीच अंतर को कम करने के लिए लाएगा नया प्रोडक्ट

SEBI ने मंगलवार को कहा कि निवेश का नया प्रोडक्ट निवेशकों की उभरती कैटेगरी की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक रेगुलेटेड जरिया उपलब्ध कराएगा.
NDTV Profit हिंदीNDTV Profit डेस्क
NDTV Profit हिंदी08:13 PM IST, 16 Jul 2024NDTV Profit हिंदी
NDTV Profit हिंदी
NDTV Profit हिंदी
Follow us on Google NewsNDTV Profit हिंदीNDTV Profit हिंदीNDTV Profit हिंदीNDTV Profit हिंदीNDTV Profit हिंदीNDTV Profit हिंदीNDTV Profit हिंदीNDTV Profit हिंदीNDTV Profit हिंदीNDTV Profit हिंदी

सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने मंगलवार को इन्वेस्टर्स के लिए 'न्यू एसेट क्लास' कैटेगरी का प्रस्ताव रखा. SEBI 10 लाख रुपये से 50 लाख रुपये के बीच इन्वेस्टीबल फंड्स वाले निवेशकों के लिए निवेश के नये विकल्प तैयार करने पर विचार कर रहा है. इसका मकसद म्यूचुअल फंड और पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस के बीच के अंतर को पाटना है.

SEBI ने मंगलवार को कहा कि निवेश का नया प्रोडक्ट निवेशकों की उभरती कैटेगरी की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक रेगुलेटेड जरिया उपलब्ध कराएगा. ये प्रोडक्ट अधिक फ्लेक्सिबल होगा.

SEBI ने कंसल्टेशन पेपर में कहा कि वो अनरजिस्टर्ड और अनधिकृत इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स के प्रसार पर भी अंकुश लगाना चाहता है.

निवेश राशि 10 लाख रुपये

SEBI ने एक या अधिक निवेश रणनीतियों में नए एसेट क्लास के तहत प्रति निवेशक न्यूनतम निवेश राशि 10 लाख रुपये निर्धारित की है. ये सीमा रिटेल निवेशकों को इस कैटेगरी में निवेश से रोकेगी और 10 लाख रुपये से 50 लाख रुपये के बीच इन्वेस्टीबल फंड्स वाले निवेशकों को आकर्षित करेगी. साथ ही वैसे प्रोडक्ट्स में निवेश करने से रोकेगी, जो अनरजिस्टर्ड और अनधिकृत इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स की ओर जारी किये जा रहे हैं.

वर्तमान में, म्यूचुअल फंड स्कीम्स लो टिकट साइज के साथ रिटेल ओरिएंटेड हैं, जबकि PMS और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स में न्यूनतम इन्वेस्टमेंट वैल्यू 50 लाख रुपये और 1 करोड़ रुपये है. नए एसेट क्लास में पहले से उपलब्ध ट्रेडिशनल इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स से अलग पहचान बनाने के लिए एक अलग नाम देगा. सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान, सिस्टेमैटिक विड्रॉल प्लान और सिस्टेमैटिक ट्रांसफर प्लान भी पेश किया जायेगा.

SEBI ने कहा कि म्यूचुअल फंड को कम से कम तीन साल तक ऑपरेशन में रहना चाहिए. 'न्यू एसेट क्लास' को लॉन्च करने के लिए पात्र होने के लिए उनके पास AUM (एसेट्स अंडर मैनेजमेंट) 10,000 करोड़ रुपये से कम नहीं होनी चाहिए.

प्रस्तावित स्ट्रक्चर

एसेट मैनेजमेंट कंपनी म्यूचुअल फंड स्कीम्स के समान पूल्ड फंड स्ट्रक्चर के तहत 'निवेश रणनीतियों' की पेशकश कर सकती है और जहां रिडेम्पशन फ्रीक्वेंसी फ्लेक्सिबल हो सकती है. ऐसी इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजीज की यूनिट्स को स्टॉक एक्सचेंजों में लिस्ट किया जा सकता है.

SEBI ने कहा कि एक फंड जो इक्विटी और इक्विटी से संबंधित इंस्ट्रूमेंट्स में लंबी और छोटी पोजीशन्स लेकर रिटर्न देने की कोशिश करता है. उसे स्टॉक एक्सचेंजों में लिस्ट किया जा सकता है.

NDTV Profit हिंदी
फॉलो करें
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT