जी एंटरटेनमेंट में सुभाष चंद्रा (Subhash Chandra) की चेयरमैनशिप सिर्फ नाम के लिए है यानी उन्हें सम्मान के तौर पर दी गई है, वो कंपनी में किसी भी डायरेक्टर के पद पर मौजूद नहीं हैं. सुभाष चंद्रा के वकील, सोमशेखर सुंदरेशन ने SAT (सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल) में ये बात कही है. सुभाष चंद्रा के लिए बहस करते हुए सुंदरेशन ने कहा कि उनके क्लाइंट के खिलाफ अंतरिम आदेश देने की कोई जल्दबाजी नहीं थी.
12 जून 2023 को SEBI की तरफ से दिए गए आदेश का जिक्र करते हुए सुंदरेशन ने कहा कि सुभाष चंद्रा, जी के बोर्ड से अगस्त 2020 में ही रिटायर हो चुके हैं. उन्हें डायरेक्टर की पोजीशन होल्ड करने से बैन करना बिल्कुल गलत और गैर-जरूरी है.
रेगुलेटर ने एक आदेश पारित कर सुभाष चंद्रा को ये निर्देश दिया है कि वो किसी पद पर नहीं रह सकते, लेकिन रेगुलेटर ने इसकी जांच नहीं की कि वो उस पद पर हैं भी या नहीं.सोमशेखर सुंदरेशन, सुभाष चंद्रा के वकील
सुंदरेशन ने अंतरिम आदेश पारित करने से पहले सुभाष चंद्रा को अपना पक्ष रखने के लिए मौका नहीं देने पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि ये अदालत में अपनाए जाने वाले प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन है.
मार्केट रेगुलेटर SEBI की तरफ से बहस करते हुए वरिष्ठ वकील डेरियस खंबाटा ने कहा कि रेगुलेटर की दलीलें, तथ्यों पर आधारित हैं. उन्होंने कोर्ट को जी एंटरटेनमेंट और एस्सेल ग्रुप की अन्य 7 कंपनियों के बीच हुए ट्रांजैक्शंस से अवगत कराया और फंड्स के मूवमेंट पर ध्यान आकर्षित किया.
डेरियस खंबाटा ने आगे कहा, 'तथ्यों के आधार पर पहली नजर में जो जानकारी इकट्ठा हुई, SEBI ने उसे ही सामने रखा है. अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. अगर पुनीत गोयनका और सुभाष चंद्रा इससे अपने नाम हटवाना चाहते हैं तो वो इसके लिए स्वतंत्र हैं. हालांकि, आदेश के दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी उन्होंने कोई जवाब दाखिल नहीं किया है.'
जब आपको जवाब दाखिल करने के लिए तीन हफ्ते का समय दिया गया है तो आप ये नहीं कह सकते कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन हुआ है. आपको ये बताने की जरूरत है कि अंतरिम आदेश ने पार्टियों पर कैसे पूर्वाग्रह डाला. रेगुलेटर जल्द से जल्द मामले की सुनवाई के लिए तैयार है.डेरियस खंबाटा, SEBI के वकील
आपको बता दें कि मार्केट रेगुलेटर SEBI ने 12 जून को जारी एक अंतरिम आदेश में एस्सेल ग्रुप (Essel Group) के चेयरमैन सुभाष चंद्रा (Subhash Chandra) और जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (ZEEL) के CEO पुनीत गोयनका (Punit Goenka) पर किसी लिस्टेड कंपनी या उसकी सब्सिडियरी में डायरेक्टर या प्रमुख प्रबंधकीय पद (Key Managerial Position) पर रहने पर रोक लगा दी थी. SEBI के अंतरिम आदेश के खिलाफ जी एंटरटेनमेंट के CEO पुनीत गोयनका ने सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) का दरवाजा खटखटाया था.