ITC होटल कारोबार का डीमर्जर दोनों कंपनियों और मौजूदा शेयरधारकों, सभी के लिए फायदेमंद साबित होगा. ये कहना है कंपनी के चेयरमैन और MD संजीव पुरी का. उनका ये 'आश्वासन' 24 जुलाई को डीमर्जर के ऐलान के बाद से कंपनी के शेयरों में करीब 7% की गिरावट के बाद सामने आया है.
विश्लेषकों के साथ बातचीत के दौरान पुरी ने कहा, 'डीमर्जर से ITC के लिए फाइनेंशियल रेश्यो में सुधार होगा, जबकि नई इकाई (ITC होटल्स) बिना किसी कर्ज के एक मजबूत बैलेंस शीट के साथ शुरू होगी. कंपनी का नेट एसेट 6,000 करोड़ रुपये का होगा.'
प्रस्तावित योजना के तहत ITC, होटल कंपनी में सीधे 40% इक्विटी का मालिक होगी, जबकि कंपनी के मौजूदा शेयरहोल्डर्स के पास बाकी 60% हिस्सेदारी होगी. संजीव पुरी के मुताबिक, आगे कोई भी हिस्सेदारी कम करना बोर्ड का निर्णय होगा और उस समय की स्थिति पर निर्भर करेगा.'
संजीव पुरी ने कहा, 'ये व्यवस्था नई इकाई को अपनी तरक्की का रास्ता तय करने और एसेट राइट्स स्ट्रैटजी के आधार पर अपने संसाधन और फंड जुटाने की आजादी देगा. साथ ही ITC की सद्भावना, ब्रैंड इक्विटी और मिलकर काम करने की भावना से होटल व्यवसाय को स्थिरता मिलेगी. कर्मियों और स्टेकहोल्डर्स को भी आराम मिलेगा.'
संजीव पुरी ने कहा, 'नई व्यवस्था, ITC की पूंजी आवंटन स्ट्रैटजी को भी तेज करेगी. ITC के पूंजीगत व्यय में होटल कारोबार का हिस्सा 20% से अधिक था. हालांकि, पिछले दशक में ITC के रेवेन्यू और EBIT में इसका योगदान 5% से कम था. डीमर्जर के बाद ITC के रिटर्न रेश्यो और वैल्यूएशन में सुधार होगा.'
क्लीन डिमर्जर वो होता है, जहां बिजनेस को एक नई कंपनी में ट्रांसफर कर दिया जाता है और इसमें सभी शेयरहोल्डर्स को नई इकाई में शेयर मिलते हैं. लेकिन इसमें एक दिक्कत है. एक शेयरहोल्डर या तो मूल कंपनी में हिस्सेदारी जारी रख सकता है या नई कंपनी में शेयरों के लिए अपने कुछ (या सभी) शेयरों का आदान-प्रदान कर सकता है.
नई इकाई को ITC की बैलेंस शीट पर एक सहयोगी कंपनी के रूप में निर्धारित किया जाएगा. ये सेगमेंट ITC को नियोजित पूंजी पर 18-20% से ज्यादा रिटर्न दे सकता है.
कंपनी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और CFO सुप्रतिम दत्ता ने निवेशित पूंजी पर रिटर्न में 10% के सुधार की उम्मीद जताई है. ये FY23 के नंबर्स पर आधारित बॉलपार्क फिगर्स थे. दत्ता ने कहा, 'स्ट्रक्चर को स्टांप शुल्क बचाने के लिए डिजाइन नहीं किया गया है.'
ITC और नई इकाई (ITC Hotels) का रजिस्टर्ड ऑफिस पश्चिम बंगाल में होगा और इस प्रकार शेयरों के इश्यू पर स्टांप शुल्क का भुगतान उसी राज्य में किया जाएगा. नए शेयरों के उचित मूल्य पर स्टांप शुल्क की दर 0.5% है. इसलिए जारी किए गए 60% स्टेक शेयर पर इसी दर से भुगतान किया जाएगा. कुल मिलाकर लागत के नजरिए से, ये महत्वपूर्ण नहीं होने जा रहा.
ITC के साथ-साथ नई इकाई के शेयर प्राप्त करने वाले शेयरहोल्डर्स के लिए, यह एक टैक्स-न्यूट्रल ट्रांजैक्शन होगा. प्रबंधन के मुताबिक, इसके अलावा, GST का भी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.
संजीव पुरी ने कहा, 'ITC के लिए प्रस्तावित स्ट्रक्चर नए शेयरहोल्डर्स की तुलना में मौजूदा शेयरहोल्डर्स को ज्यादा रिवार्ड देने के लिए डिजाइन की गई है.' प्रबंधन के मुताबिक, प्रस्तावित पुनर्गठन में ITC और नई इकाई, दोनों को संस्थागत तालमेल से लाभ मिलता रहेगा.'
पुरी ने कहा, होटल इकाई को ITC का सपोर्ट मिलेगा, जिससे कर्मियों को आराम मिलेगा. ITC अपनी अलग इकाई से अपने फूड वर्टिकल के लिए भी तालमेल बनाएगी.
पुरी ने कहा कि होटल कारोबार में जाने वाले कर्मियों को मिलने वाला लाभ किसी भी तरह से ITC से कमतर नहीं होगा.
संजीव पुरी का मानना है कि नई इकाई के लिए कर्ज जुटाना कोई समस्या नहीं होगी. संजीव पुरी ने कहा, 'ITC होटल्स के पास निवेशकों या डेट मार्केट के माध्यम से अपनी पूंजी जुटाने की क्षमता होगी, क्योंकि इसकी बैलेंस शीट बहुत मजबूत होगी. डीमर्जर के बाद ऐसी स्थिति बनने जा रही है, जहां ये कम पूंजी के साथ एसेट-लाइट होगी.'
पुरी ने कहा कि ITC और उसके ब्रैंड एसेट के इस्तेमाल के लिए नई इकाई के साथ इंडस्ट्री स्टैंडर्ड के आधार पर रॉयल्टी की व्यवस्था होगी.
ITC को अपने किसी भी मौजूदा शेयरहोल्डर्स के साथ शेयर खरीदने की कोई व्यवस्था नहीं करनी होगी, यदि वे नई इकाई में अपनी हिस्सेदारी बेचना चाहते हैं. प्रबंधन के अनुसार, नई इकाई का प्रत्येक शेयरहोल्डर अपनी हिस्सेदारी के संबंध में स्वतंत्र निर्णय ले सकेगा.
पुरी ने कहा, 'ITC होटल व्यवसाय में निवेशित रहेगी. हमारा इरादा कभी भी होटल व्यवसाय से पूरी तरह बाहर नहीं निकलने का था. उन्होंने कहा, 'पर्यटन उद्योग अच्छी स्थिति में है, और इस (नई कंपनी) में निवेशकों की रुचि अधिक नहीं तो कम से कम ITC के बराबर तो रहेगी.'
प्रस्तावित पुनर्गठन और योजनाओं को मंजूरी देने के लिए 14 अगस्त को एक बोर्ड बैठक आयोजित की गई है. मंजूरी के बाद ITC स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्ट होगी. इस प्रक्रिया में 12-18 महीने लगने की संभावना है. पुरी ने निष्कर्ष निकाला कि 'इस समय यह सबसे अच्छी व्यवस्था है.'