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रिजर्व बैंक ने उच्चतम न्यायालय से कहा, क्रिप्टो करेंसी से गैरकानूनी लेनदेन को प्रोत्साहन मिलेगा

भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में उच्चतम न्यायालय से कहा कि बिटकॉइन जैसी क्रिप्टो करेंसी (आभासी मुद्रा) में सौदों की अनुमति देने से गैरकानूनी लेनदेन को प्रोत्साहन मिलेगा. केंद्रीय बैंक ने कहा कि उसने पहले ही इस तरह की आभासी मुद्राओं पर प्रतिबंध के लिए परिपत्र जारी कर दिया है.
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NDTV Profit हिंदी01:40 PM IST, 26 Jul 2018NDTV Profit हिंदी
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भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में उच्चतम न्यायालय से कहा कि बिटकॉइन जैसी क्रिप्टो करेंसी (आभासी मुद्रा) में सौदों की अनुमति देने से गैरकानूनी लेनदेन को प्रोत्साहन मिलेगा. केंद्रीय बैंक ने कहा कि उसने पहले ही इस तरह की आभासी मुद्राओं पर प्रतिबंध के लिए परिपत्र जारी कर दिया है. 

क्रिप्टो करेंसी सरकार नियंत्रण से बाहर की डिजिटल मुद्रा है , जिसमें कारोबार के लिए कूट तकनीक का इस्तेमाल होता है. ये मुद्राएं रिजर्व के नियंत्रण के बाहर काम करती हैं. इनमें सरकार की ओर से हस्तक्षेप नहीं होता. मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पीठ के समक्ष केंद्रीय बैंक की ओर से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने कहा कि केंद्र ने क्रिप्टो करेंसी या आभासी मुद्रा के मुद्दे से निपटने को एक समिति बनाई है. 

इस मामले पर शीर्ष अदालत से अंतिम और तत्काल निर्णय की जरूरत है. पीठ में न्यायमूर्ति ए एम खानविल्कर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ भी शामिल हैं. केंद्रीय बैंक और केंद्र सरकार ने इस बारे में कई याचिकाओं पर अपने जवाब के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा है. पीठ ने केंद्र और रिजर्व बैंक को अपना जवाब दाखिल करने के लिए और समय देते हुए इन याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई की तारीख 11 सितंबर तय की है. 

कुछ याचिकाओं में आभासी मुद्राओं के इस्तेमाल को चुनौती देते हुए कहा गया है कि ये परंपरागत अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा हैं. याचिकाओं में इन मुद्राओं के नियमन के लिए दिशानिर्देश बनाने की भी अपील की गई है. इसके अलावा याचिकाओं में सरकार से इन गैरकानूनी क्रिप्टो करेंसी की खरीद फरोख्त को रोकने का भी आग्रह किया गया है. वहीं कुछ अन्य याचिकाओं में रिजर्व बैंक की छह अप्रैल की उस अधिसूचना को चुनौती दी गई है जो आभासी मुद्राओं में लेनदेन पर रोक लगाती है.

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