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दुनिया की कैंसर राजधानी बनने की तरफ भारत; पश्चिम के मुकाबले भारतीय युवाओं में कैंसर की गिरफ्त ज्यादा

अमेरिका और ब्रिटेन समेत बाकी दुनिया की तुलना में भारत में कैंसर के मामलों की कम उम्र के लोगों में ग्रोथ ज्यादा है. ऊपर से ये स्थिति तब है, जब भारत में स्क्रीनिंग दूसरे देशों के मुकाबले बेहद ही कम है.
NDTV Profit हिंदीNDTV Profit डेस्क
NDTV Profit हिंदी01:06 PM IST, 08 Apr 2024NDTV Profit हिंदी
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अपोलो हॉस्पिटल्स (Apollo Hospitals) की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत तेजी से दुनिया की कैंसर राजधानी बनने की तरफ बढ़ रहा है. 'हेल्थ ऑफ द नेशन (Health Of The Nation)' नाम की इस रिपोर्ट के मुताबिक 2020 में कैंसर के 13.9 लाख मामले देश में थे, जो 2025 तक 13% बढ़कर 15.7 लाख पहुंच जाएंगे.

लेकिन चिंता की बात सिर्फ इतनी नहीं है. दरअसल अब कैंसर अपेक्षाकृत युवा आबादी में फैलता जा रहा है. मतलब तमाम तरह के कैंसर के रोगियों की औसत उम्र कम हो रही है.

अमेरिका और ब्रिटेन समेत बाकी दुनिया की तुलना में भारत में कैंसर के मामलों की कम उम्र के लोगों में ग्रोथ ज्यादा है. ऊपर से ये स्थिति तब है, जब भारत में स्क्रीनिंग दूसरे देशों के मुकाबले बेहद ही कम है.

ब्रेस्ट कैंसर के सबसे ज्यादा मामले, पुरुषों में फेफड़ों का कैंसर सबसे आम

रिपोर्ट के मुताबिक पूरी आबादी में ब्रेस्ट कैंसर के मामले सबसे ज्यादा हैं. महिलाओं इसके बाद सर्विक्स और ओवरी कैंसर के मामले ज्यादा हैं. वहीं पुरुषों में फेफड़ों का कैंसर सबसे ज्यादा होता है, इसके बाद मुंह का कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर सबसे आम है.

रिपोर्ट में करीब 17 राज्यों में अलग-अलग तरह के कैंसर के आंकड़े उपलब्ध हैं. इनके मुताबिक हर 1 लाख की आबादी में पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल में ब्रेस्ट कैंसर के ही 30 से ज्यादा मामले हैं.

वहीं फेफड़ों के कैंसर की बात करें, तो मिजोरम में हर 1 लाख की आबादी में 10 से ज्यादा मामले हैं. जबकि कर्नाटक, तेलंगाना, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में 1 लाख की आबादी में 5 से 10 पुरुषों में फेफड़ों के कैंसर के मामले पाए गए हैं. जबकि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, असम, मेघालय, त्रिपुरा, नागालैंड, तमिलनाडु और केरल में पुरुषों की हर 1 लाख की आबादी में 3 से 5 मामले फेफड़ों के कैंसर के मिले हैं.

युवा आबादी में पैर पसार रहा है कैंसर

कैंसर अब अपेक्षाकृत युवा आबादी में तेजी से पैर पसार रहा है. ब्रेस्ट कैंसर के रोगियों की औसत उम्र अब कम होकर 52 साल हो गई है. जबकि अमेरिका में औसत उम्र 63 साल, ब्रिटेन में 63 साल और चीन में 50 साल है.

वहीं सर्वाइकल कैंसर के रोगियों की औसत उम्र अब भारत में 54 साल हो चुकी है. जबकि चीन में ये 60 साल और अमेरिका व ब्रिटेन में 50-50 साल है.

सबसे बुरी स्थिति तो फेफड़ों के कैंसर की है. यहां भारत में रोगियों की औसत उम्र कम होकर 59 साल हो गई है. जबकि ब्रिटेन में फेफड़ों के कैंसर के रोगियों की औसत उम्र 75 साल, अमेरिका में 70 साल और चीन में 68 साल है.

कोलन (आंत) कैंसर भी बहुत तेजी से युवा लोगों में बढ़ रहा है. अगले एक दशक में इसके दोगुने होने की आशंका है. अपोलो हॉस्पिटल्स में कोलन कैंसर के 30% रोगियों की उम्र 50 साल से कम है.

भारत में बेहद कम है स्क्रीनिंग

भारत में कैंसर से बचाव के लिए कैंसर स्क्रीनिंग को बढ़ाने की बेहद ज्यादा जरूरत है. दूसरे देशों की तुलना में भारत में कैंसर स्क्रीनिंग बेहद कम है.

पूरी आबादी के स्क्रीनिंग रेट के हिसाब से देखें तो ब्रेस्ट कैंसर के लिए भारत में सिर्फ 1.9% आबादी की ही स्क्रीनिंग हुई है. जबकि अमेरिका में 74-82%, चीन में 70% और ब्रिटेन में 21-24% आबादी की स्क्रीनिंग हो चुकी है.

वहीं सर्वाइकल कैंसर की बात करें, तो भारत में महज 0.9% आबादी की ही इस तरह के कैंसर के लिए स्क्रीनिंग हुई है, जबकि अमेरिका में ये आंकड़ा 71-74%, चीन में 75% और ब्रिटेन में 37-43% है.

भारत में फेफड़ों के कैंसर की स्क्रीनिंग से जुड़े आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं. लेकिन अमेरिका में करीब 14-16%, चीन में 20-52% और ब्रिटेन में 33% आबादी की लंग कैंसर स्क्रीनिंग हुई है.

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