'नीम हकीम खतरा-ए-जान' आपने ये कहावत तो सुनी ही होगी! मतलब साफ है कि अधूरा ज्ञान खतरनाक/जानलेवा हो सकता है. इसलिए अक्सर सलाह दी जाती है कि किसी बीमारी का इलाज केवल योग्य और प्रशिक्षित चिकित्सकों से ही करवाना चाहिए.
...लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर साल धारावी में विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से होने वाली 100 मौतों में से 5 मौतों का कारण 'झोलाछाप डॉक्टर्स है?
देश की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती में हर साल 4% से 5% मौतें झोलाछाप डॉक्टर्स के इलाज की वजह से होती हैं.
धारावी में गरीब लोगों के पास इतने पैसे नहीं होते कि वे 150-300 रुपये फीस लेने वाले जनरल फिजिशियन के पास जाएं. मजबूरी में वे 50-100 रुपये में इलाज करने वाले झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाते हैं.
1985 से धारावी में प्रैक्टिस कर रहे डॉ अनिल पचनेकर कहते हैं, 'झोलाछाप डॉक्टर हर मर्ज का इलाज एक इंजेक्शन से करते हैं. उन्हें न तो एलर्जी की परवाह होती है, न साइड इफेक्ट्स की. 90% मामलों में मरीज ठीक हो जाते हैं, लेकिन 10% में गंभीर जटिलताएं पैदा हो जाती हैं. तब ये तथाकथित डॉक्टर गायब हो जाते हैं.'
डॉ पचनेकर, जो इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (मुंबई) के पूर्व अध्यक्ष भी रहे हैं, बताते हैं कि धारावी में जगह और आधारभूत सुविधाओं की कमी के चलते अच्छे डॉक्टर यहां क्लिनिक खोलने से बचते हैं. 'रीडेवलपमेंट के बाद धारावी की पहचान बदलेगी और विशेषज्ञ डॉक्टर भी यहां आने लगेंगे.'
पचनेकर कहते हैं, 'जब मरीज की हालत बिगड़ती है, तो उसके परिवार वाले मुझे रात में कॉल करते हैं. मैं पूरी कोशिश करता हूं कि उन्हें संभालूं और इलाज करूं, लेकिन मेरी भी सीमाएं हैं.'
उनका मानना है कि मुंबई महानगरपालिका और पुलिस अगर साथ मिलकर कार्रवाई करें, तो झोलाछाप डॉक्टरों की समस्या पर लगाम लगाई जा सकती है. उन्होंने कहा, 'मैं धारावी के लोगों की सेवा में अब भी जुटा हूं और तब तक करता रहूंगा जब तक इन फर्जी डॉक्टरों को बाहर न कर दूं.'
पचनेकर ने बताया कि उन्होंने बीते 40 साल में ऐसे 10 झोलाछाप डॉक्टरों को जेल भिजवाया है. 1990 के दशक में जब मुंबई में अंडरवर्ल्ड सक्रिय था, तब उन्होंने एक सूची बनाकर प्रशासन को सौंपी थी. लेकिन लिस्ट लीक हो गई और उन्हें धमकी भरे कॉल्स आने लगे.
पचनेकर मानते हैं कि धारावी का पुनर्विकास (Dharavi Redevelopment) झोलाछाप डॉक्टरों पर रोक लगाने का एक बड़ा मौका है. 'ये सभी झोलाछाप किराए के कमरों से काम करते हैं. रीडेवलपमेंट में ऐसे किराएदारों को कोई लाभ नहीं मिलेगा, जिससे उन्हें बाहर जाना ही पड़ेगा.'