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अमेरिका H1-B आवेदनों में आई 25% की गिरावट! एप्लीकेशन फीस में बढ़ोतरी और छंटनी का दिखा असर

H-1B वीजा एक नॉन-इमिग्रेंट वीजा है जो अमेरिकी एम्पलॉयर्स को स्पेशिएलिटी कामों में अस्थायी रूप से विदेशी श्रमिकों को नियुक्त करने की अनुमति देता है
NDTV Profit हिंदीNDTV Profit डेस्क
NDTV Profit हिंदी09:12 AM IST, 20 May 2025NDTV Profit हिंदी
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लगता है भारतीयों में अब अमेरिका जाकर नौकरी करने का सपना धुंधला हो रहा है, ऐसा इसलिए क्योंकि वित्त वर्ष 2026 के लिए दायर H-1B वीजा आवेदनों की संख्या पिछले साल की तुलना में 25% घटकर 358,737 रह गई हैं. ये जानकारी मिली है यूनाइटेड स्टेट्स सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) की ओर से जारी आंकड़ों से. ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि डगमगाती आर्थिक स्थिति की वजह से कंपनियों में छंटनियां हो रही हैं और एप्लीकेशन फीस को महंगा कर दिया गया है.

27% कम रजिस्ट्रेशंस का चयन

USCIS की ओर से जारी किए गए डेटा के मुताबिक, कुल रजिस्ट्रेशंस में से 1,20,141 का चयन किया गया है, जो पिछले साल चुने गए 1,35,137 से 27% कम है. अमेरिका हर साल 85,000 H1-B वीजा जारी करता है. H-1B वीजाधारकों में से ज्यादातर भारतीय हैं. 2022 में मंजूर किए गए 3,20,000 H-1B वीजा में से 77% भारतीय नागरिकों को दिए गए, और ये प्रतिशत 2023 में भी ऊंचा रहा था, जो दिए गए 3,86,000 वीजा में से 72.3% था.

अब सवाल उठता है कि वीजा आवेदनों में ये गिरावट क्यों आई. इसके पीछे एक बड़ी वजह मानी जा रही है एप्लीकेशन फीस को महंगा करना. अमेरिकी प्रशासन ने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल के दौरान एक नया फीस नियम पेश किया था. जिससे एप्लीकेशन दाखिल करने की लागत 10 डॉलर से बढ़ाकर सीधा 215 डॉलर कर दी गई.

H-1B वीजा एक नॉन-इमिग्रेंट वीजा है जो अमेरिकी एम्पलॉयर्स को स्पेशिएलिटी कामों में अस्थायी रूप से विदेशी श्रमिकों को नियुक्त करने की अनुमति देता है. इन बिजनेसेज के लिए आमतौर पर खास क्षेत्र में स्नातक की डिग्री या समकक्ष की जरूरत होती है. H-1B कार्यक्रम एम्पलॉयर्स को पदों को भरने के लिए स्किल्ड वर्कर्स को लाने की अनुमति देने के लिए डिजाइन किया गया है. आमतौर पर इसका इस्तेमाल टेक्नोलॉजी कंपनियों की ओर से स्किल्ड वर्कफोर्स हासिल करने के लिए किया जाता है.

फिलहाल ये सेक्टर वैश्विक स्तर पर मंदी में है, मैक्रो-इकोनॉमिक अनिश्चितताएं बढ़ रही हैं, वैश्विक स्तर पर बड़े पैमाने पर छंटनी हो रही है. हाल ही में, माइक्रोसॉफ्ट ने 6,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया, जो इसके कुल कर्मचारियों का लगभग 3% है, और ये 2023 के बाद से इसकी सबसे बड़ी छंटनी है. अमेजॉन ने भी अपने डिवाइस और सर्विस डिपार्टमेंट से 100 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है. हाल के दिनों में इंटेल, क्राउडस्ट्राइक और बरबेरी जैसी दूसरी टेक्नोलॉजी कंपनियों ने भी कर्मचारियों की छंटनी की है.

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