दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून सुक येओल ने मंगलवार को मार्शल लॉ का ऐलान किया और फिर सांसदों के जोरदार विरोध के बीच महज 6 घंटे के भीतर इस आदेश को वापस ले लिया. इस तरह दक्षिण कोरिया, इतिहास में सबसे कम समय के लिए मार्शल लॉ लगाने वाला देश बन गया.
NDTV World की रिपोर्ट के मुताबिक, यून ने बुधवार सुबह स्थानीय समयानुसार करीब 4:30 बजे राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा, 'अभी कुछ देर पहले, नेशनल असेंबली से इमरजेंसी की स्थिति हटाने की मांग की गई थी और इसलिए हमने मार्शल लॉ अभियानों के लिए तैनात सेना को वापस बुला लिया है. हम नेशनल असेंबली के अनुरोध को स्वीकार करेंगे और कैबिनेट की बैठक के माध्यम से मार्शल लॉ हटा लेंगे.'
दक्षिण कोरिया एशिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और ये अमेरिका का एक प्रमुख सहयोगी है. यहां लंबे समय से लोकतंत्र रहा है. ऐसे में मार्शल लॉ का फैसला ग्लोबल लेवल पर अलार्म से कम नहीं था.
इससे पहले यून ने मार्शल लाॅ की घोषणा करते हुए कहा था कि देश को कम्युनिस्ट ताकतों से बचाने और राज्य विरोधी तत्वों को खत्म करने के लिए ये कदम जरूरी है. उदार संवैधानिक व्यवस्था की रक्षा के लिए और उत्तर कोरिया समर्थक ताकतों को देश से हटाने के लिए उन्होंने मार्शल लॉ को जरूरी बताया था.
दक्षिण कोरिया के सांसदों ने राष्ट्रपति के फैसले की निंदा करने के लिए नेशनल असेंबली के आधी रात के सत्र में मार्शल लॉ लगाने के खिलाफ सर्वसम्मति से वोटिंग की थी. राष्ट्रपति इस वोटिंग का सम्मान करने के लिए सहमत हुए, जैसा कि सेना प्रमुख ने किया था.
राष्ट्रपति के आदेश वापस लेने और राष्ट्र को संबोधित करने के कुछ ही समय बाद, दक्षिण कोरियाई कैबिनेट ने आधिकारिक तौर पर मार्शल लॉ हटाने के प्रस्ताव को मंजूरी देने के लिए सुबह 5 बजे (स्थानीय समय) बैठक बुलाई.
सून के मार्शल लॉ के फैसले के बाद देश में खूब विरोध हुआ. राजनेता और प्रदर्शनकारी नेशनल असेंबली के बाहर इकट्ठा हो गए और विरोध में नारेबाजी कर रहे थे. भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले भी दागे. इस बीच देश की करेंसी में भी गिरावट दर्ज की गई. हालांकि, संसद में मतदान के लिए राष्ट्रपति यून के सहमत होने के बाद स्थिति में सुधार हुआ.
करीब साढ़े चार दशक में ये पहली बार था, जब दक्षिण कोरिया ने मार्शल लॉ लगाया. इस फैसले के तहत राजनीतिक गतिविधि पर प्रतिबंध लगाया गया था और मीडिया को सेंसर कर दिया गया था. इससे पहले 1980 में ऐसा हुआ था.
दरअसल, दक्षिण कोरिया अपने परमाणु सशस्त्र पड़ोसी उत्तर कोरिया से लगातार खतरे में है. हालांकि राष्ट्रपति यून ने मार्शल लॉ लगाने के लिए, पड़ोसी देश के प्रमुख किम जोंग-उन से किसी विशेष खतरे का उल्लेख नहीं किया था. राष्ट्रपति यून भी हाल के दिनों में लोकप्रिय नहीं रहे हैं. खबरों के मुताबिक, उनकी नेशनल रेटिंग गिरकर महज 20% के करीब पहुंच गई है.
दूसरी ओर इस साल अप्रैल में हुए आम चुनाव में अपनी पार्टी पीपुल्स पावर पार्टी की करारी हार के बाद राष्ट्रपति यून घरेलू राजनीतिक दबाव में चल रहे हैं. चुनाव परिणाम से विपक्ष को संसद में दो तिहाई से अधिक बहुमत मिल गया था.
यून पर सत्ता के कथित दुरुपयोग के भी आरोप है. विपक्ष ने उन पर महाभियोग चलाने की भी मांग की थी. विपक्ष का कहना है कि मार्शल लॉ लगा कर राष्ट्रपति, महाभियोग से बचना चाहते थे. विपक्षी नेता ली जे-म्युंग ने मार्शल लॉ के दुरुपयोग की ओर इशारा करते हुए चेतावनी दी थी कि मार्शल लॉ 'पूर्ण तानाशाही' को जन्म दे सकता है.