Tax Savings on Home Loan EMI: मौजूदा वित्त वर्ष 31 मार्च को खत्म होने जा रहा है. टैक्सपेयर्स अपनी टैक्स सेविंग्स को ज्यादा से ज्यादा बढ़ाने में व्यस्त हैं. आम तरीकों में इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के तहत टैक्स-सेविंग इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश (Investment) या रिटायरमेंट फंड्स में योगदान शामिल हैं. हालांकि एक और तरीका भी है, जिस पर लोग ध्यान नहीं देते हैं वो है वित्त वर्ष खत्म होने से पहले होम लोन पर समय से पहले EMI का भुगतान करना.
इससे इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के तहत टैक्स बेनेफिट्स मिल सकते हैं. होम लोन लेने वाले इनकम टैक्स एक्ट के अलग-अलग सेक्शंस के तहत अपनी EMI के प्रिंसिपल और इंट्रस्ट दोनों कंपोनोंट्स पर टैक्स बेनफिट क्लेम कर सकते हैं.
होम लोन EMIs में दो कंपोनेंट्स शामिल हैं: प्रिंसिपल रेपेमेंट और इंट्रस्ट पेमेंट. दोनों ये चीजें इनकम टैक्स एक्ट के अलग-अलग सेक्शंस के तहत टैक्स डिडक्शन के लिए योग्य हैं.
प्रिंसिपल रिपेमेंट (सेक्शन 80C): आपकी EMI का प्रिंसिपल कंपोनेंट सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपये प्रति वित्त वर्ष तक के डिडक्शन के लिए योग्य है.
इंट्रस्ट पेमेंट (सेक्शन 24(b)): खुद खरीदी गई प्रॉपर्टीज में ब्याज पर वित्त वर्ष में 2 लाख रुपये तक का डिडक्शन लिया जा सकता है. किराये पर ली गईं प्रॉपर्टीज पर पूरे ब्याज को बिना ऊपरी सीमा के डिडक्शन के तौर पर क्लेम किया जा सकता है.
सेक्शन 80C की सीमा का पूरा इस्तेमाल करें: अगर आपने अब तक सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपये की सीमा का पूरा इस्तेमाल नहीं किया है तो 31 मार्च से पहले अतिरिक्त प्रिंसिपल पेमेंट का भुगतान करके आप टैक्स बेनेफिट्स का ज्यादा से ज्यादा फायदा ले सकते हैं.
ब्याज का बोझ घटाना: अतिरिक्त EMI या भुगतान करके या 31 मार्च से पहले लोन का हिस्सा चुकाकर आप प्रिंसिपल को घटा सकते हैं, जिससे लंबी अवधि में ब्याज का भुगतान कम होगा.
अधकितम इंट्रस्ट डिडक्शन को क्लेम करना: अगर आपके होम लोन का ब्याद का भुगतान 2 लाख रुपये की सीमा पर नहीं पहुंचता है तो समय से पहले EMI का भुगतान करने पर आपको इस संख्या पर पहुंचने और ज्यादा से ज्यादा टैक्स सेविंग्स करने में मदद मिल सकती है.
डिडक्शन से न चूकें: अगर आप भुगतान को अगले वित्त वर्ष के लिए टाल देते हैं तो आप टैक्स डिडक्शन के लिए चूक सकते हैं जिसे मौजूदा वित्त वर्ष के लिए क्लेम किया जा सकता था.
अपनी लोन स्टेटमेंट को चेक करें: ये देखें कि आपने वित्त वर्ष में कितनी प्रिंसिपल अमाउंट और ब्याज का भुगतान किया है.
इंटरनेट बैंकिंग या UPI का इस्तेमाल करें: ज्यादातर बैंक अपने ऑनलाइन पोर्टल के जरिए अतिरिक्त EMI पेमेंट्स या पार्ट पेमेंट्स की इजाजत देते हैं.
अपने बैंक के साथ कन्फर्म करें: ये सुनिश्चित करें कि भविष्य में ब्याज को घटाने के लिए एक्स्ट्रा पेमेंट को प्रिंसिपल के बदले एडजस्ट किया जाए.
टैक्स रिकॉर्ड्स को अपडेट करें: टैक्स फाइलिंग को आसान बनाने के लिए पेमेंट का रिकॉर्ड रखें.