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HRA, LTA और अन्य कंपोनेंट्स से कैसे पड़ेगा आपकी टैक्स लायबिलिटी पर असर, समझें सैलरी ब्रेकअप

आपका वेतन आम तौर पर कई कंपोनेंट्स में बंटा होता है, जिनमें से हर एक का टैक्स पर असना असर है.
NDTV Profit हिंदीNDTV Profit डेस्क
NDTV Profit हिंदी10:06 AM IST, 03 May 2025NDTV Profit हिंदी
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जब आपको अपना मासिक वेतन (Salary) मिलता है, तो आपके खाते में जमा की गई राशि अक्सर पूरी तस्वीर का एक हिस्सा होती है. आपका वेतन आमतौर पर कई कंपोनेंट्स में बंटा होता है, जिनमें से हर एक का टैक्स (Tax) पर अपना असर है. इन्हें समझने से आपको बेहतर योजना बनाने, ओवरऑल टैक्स लायबिलिटी को कम करने और अपनी इन-हैंड सैलरी को ज्यादा से ज्यादा बढ़ाने में मदद मिल सकती है.

बेसिक सैलरी

बेसिक सैलरी आपकी सैलरी का मूल है. ये HRA, प्रोविडेंट फ़ंड और ग्रेच्युटी जैसे अन्य सैलरी कंपोनेंट्स का आधार बनता है. हालांकि, ये पूरी तरह से टैक्सेबल है और यहां टैक्स सेविंग की बहुत कम गुंजाइश है.

हाउस रेंट अलाउंस (HRA)

नियोक्ताओं की ओर से कर्मचारियों को किराए के घर में रहने की लागत को पूरा करने में मदद करने के लिए हाउस रेंट अलाउंस (HRA) दिया जाता है. हालांकि ये वेतन का हिस्सा है, लेकिन HRA पूरी तरह से टैक्सेबल नहीं है. आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10(13A) के तहत HRA के एक हिस्से को कुछ शर्तों के अधीन टैक्स से छूट दी जा सकती है.

HRA छूट को कैसे कैलकुलेट करें?

HRA छूट का पता लगाने के लिए इनमें से सबसे कम को क्लेम किया जा सकता है:

  • एंप्लॉयर की ओर से मिला असल HRA

  • असल में भुगतान किए गए किराए में से मूल वेतन और महंगाई भत्ते (DA) का 10% घटाया गया

  • अगर आप मेट्रो शहर (दिल्ली, मुंबई, चेन्नई या कोलकाता) में रहते हैं तो मूल वेतन और महंगाई भत्ते का 50%.

  • गैर-मेट्रो शहरों के लिए मूल वेतन का 40%+ महंगाई भत्ता.

लीव ट्रैवल अलाउंस (LTA)

लीव ट्रैवल अलाउंस (LTA), किसी कर्मचारी के वेतन पैकेज का एक कंपोनेंट है, जिसका उद्देश्य छुट्टियों के दौरान किए गए यात्रा के खर्च को कवर करना है. ये कंपनी की कुल लागत (CTC) का हिस्सा बनता है और आमतौर पर इसे सालाना लाभ के रूप में पेश किया जाता है. LTA को जो बात अलग बनाती है, वो है आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10(5) के तहत टैक्स छूट की इसकी संभावना.

प्रोविडेंट फंड (PF)

प्रोविडेंट फंड (PF) कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, एक कर्मचारी को 1,800 रुपये या मूल वेतन और DA का 12% योगदान देना चाहिए. नियोक्ता भी EPF खाते में समान राशि का योगदान करता है.

एक वित्त वर्ष में EPF खाते में कर्मचारी द्वारा प्रति वर्ष 2.5 लाख रुपये से अधिक के योगदान पर ब्याज कर्मचारी के हाथों में टैक्सेबल है.

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