आज के समय में लोन लेना बहुती आसान है पर उस चुका पाना उतना ही मुश्किल है. कार से लेकर दिन की जरूरी सामान के लिए आज लोग लोन ले रहे हैं. कॉस्ट फ्री EMI, बाय-नाउ-पे-लेटर जैसी लुभावनी स्किम में फंस कर आम आदमी आज बस लोन ही चुका रहा है. और जब से इंस्टेंट लोन का मामला शुरू हुआ है तब से कर्ज लेने वालों की संख्या तिगुनी रफ्तार से बढ़ी है. ऐसे में डिफॉल्टर की संख्या में भी इजाफा हो रहा है. हद तो तब हो जाती है जब एक लोन को बंद करने के लिए दूसरा लोन ले लिया जाता है. खैर, डिजिटल लोन को चुकाते समय अगर कुछ बातों को ध्यान में रखा जाए तो इस कर्ज के जाल से बचा जा सकता है.
अगर आपने कई लोन लिए हुए हैं और EMI के जाल से निकलना चाहते हैं तो सबसे पहले बड़े लोन को पहले चुकाएं. ऐसा करने से जो ब्याज आपका बजट बिगाड़ रहा है वो पहले खत्म हो जाए. उसके लिए एक सभी लोन की लिस्ट बनाएं और देखें कि किस लोन की EMI पर सबसे ज्यादा इंटरेस्ट जा रहा है. उससे पहले पे कर दें.
आज के समय में देखा जा रहा है कि लोग एक लोन को चुकाने के लिए दूसरा लोन ले लेते हैं. इससे होता ये है कि कभी भी ब्याज के जाल से बाहर नहीं निकल पाते. हां, ये ट्रिक तभी काम कर सकती है जब दूसरे लोन की ब्याज की दर पहले वाले लोन से कम हो.
अक्सर लोग क्रेडिट कार्ड के मिनिमम पेमेंट के चक्कर में पड़ जाते हैं. बाहर से देखने में लगता है कि बस 5 या 10% पेमेंट करके कार्ड को चालू रखा जा सकता है, पर कुछ समय बाद पता चलता है कि प्रिसिंपल अमाउंट जैसा था वैसा ही बना हुआ है. ब्याज और दोगुनी हो गई है. इसलिए अगर कार्ड का पेमेंट एक साथ कर पाएं तो अच्छा है.
बैलेंस ट्रांसफर करने की सुविधा कुछ बैंक देते हैं. इसमें जब बैंक को लगता है कि आप इस लोन का पेमेंट नहीं कर पाएंगे तब बैंक लोन के रूप में और ज्यादा पैसे आपको देते हैं. साथ ही उसकी ब्याज की दर भी कम रहती है. इस सुविधा का लाभ लेने के लिए बैंक से बात की जा सकती है. और जब पैसा आ जाए तो बड़े कर्ज का निपटारा आसानी से किया जा सकता है.