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ये 5 PSU बैंक आए SEBI के रडार पर, डाला ASM फ्रेमवर्क में!

अगर रेगुलेटर और स्टॉक एक्सचेंज प्रोमोटर्स होल्डिंग को कम करने में असमर्थ हों, तो भी वो प्राइस बैंड घटाकर शेयरों के तेज उतार-चढ़ाव को कम कर सकते हैं.
NDTV Profit हिंदीसजीत मंघाट
NDTV Profit हिंदी04:50 PM IST, 06 Feb 2024NDTV Profit हिंदी
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बीते 12 महीने में PSU बैंक शेयरों में शानदार उछाल देखने को मिला है. कुछ एक शेयर तो इन 12 महीनों में दोगुने से भी ज्यादा बढ़ गए हैं. लेकिन क्या PSU बैंकों की ही तरह प्राइवेट कंपनियों के पास न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग न रखने की सुविधा है?

इस बात में कोई दोराय नहीं कि मार्केट रेगुलेटर SEBI पब्लिक सेक्टर कंपनियों और बैंकों के न्यूनतम पब्लिक फ्लोट रेगुलेशन पर ज्यादा कुछ नहीं कर सकता है. लेकिन रेगुलेटर इनके शेयरों में ब्लॉक ट्रेडिंग और छोटे ट्रेडिंग वॉल्यूम के जरिए तेज उतार-चढ़ाव पर लगाम लगा सकता है और SEBI ने ये काम 5 PSU बैंकों पर कर दिया है.

UCO बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया इन 5 PSU बैंक की लिस्ट में शामिल हैं.

जब किसी PSU बैंक के फंडामेंटल्स अच्छे हों, तो कम लिक्विडिटी और तेज उतार-चढ़ाव को देखकर छोटे निवेशक ललचाते हैं और आकर्षित होते हैं.

जिन लोगों ने बाजार में नया-नया निवेश करना शुरू किया है, उनके लिए इतना है कि ये 5 शेयर साल 2000 के करीब जन्मे 'विप्रो इफेक्ट' से जूझ रहे हैं. विप्रो के अधिकतर शेयर अजीम प्रेमजी के पास थे, जिससे कम लिक्विडिटी वाले विप्रो शेयर कम वॉल्यूम ट्रेड में ही उछल पड़ते थे. इसके चलते, न्यूनतम पब्लिक गाइडलाइंस को लागू किया गया. इसके चलते लिक्विडिटी में सुधार हुआ और इंस्टीट्यूशंस का IT सर्विस कंपनी में इंटरेस्ट बढ़ा.

जो प्राइवेट कंपनियां SEBI के न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग नियमों का पालन नहीं करती हैं, एक्सचेंजेज उनकी शेयरहोल्डिंग को फ्रीज कर सकते हैं और आखिरकार शेयर की डीलिस्टिंग हो सकती है. लेकिन PSU बैंकों के मामले में ऐसा करने का कोई मतलब नहीं, क्योंकि इनकी शेयरहोल्डिंग सीधे सरकार के पास है.

इसके चलते, SEBI और एक्सचेंजेज ने प्री-एम्पटिव सर्विलांस मेजर्स को लागू किया है. इन नियमों में प्राइस बैंड में कमी, समय-समय पर कॉल ऑक्शन और सिक्योरिटीज का ट्रांसफर और समय-समय पर 'ट्रेड फॉर ट्रेड' डिलीवरी का विकल्प है.

रेगुलेटर PSU बैंकों को लेकर सोचने का तरीका बदल रहा है.

बीते 12 महीने में UCO बैंक का शेयर दोगुना हुआ और सोमवार को 14% उछला. शेयर का नेट फ्री फ्लोट 51% रहा, जबकि डिलीवरी महज 20% की रही.

पंजाब एंड सिंध बैंक बीते 12 में 145% चढ़ा. सोमवार को शेयर में 7% की तेजी दिखी. शेयर का नेट फ्री फ्लोट 68% रहा, जबकि डिलीवरी 19.4% रही.

यही ट्रेंड इंडियन ओवरसीज बैंक, सेंट्रल बैंक और कुछ हद तक यूनियन बैंक में देखा जा सकता है.

अगर रेगुलेटर और स्टॉक एक्सचेंज प्रोमोटर्स होल्डिंग को कम करने में असमर्थ हों, तो भी वो प्राइस बैंड घटाकर शेयरों के तेज उतार-चढ़ाव को कम कर सकते हैं और छोटे निवेशकों के हितों की रक्षा कर सकते हैं.

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