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Karnataka Election Results 2023: भारत जोड़ो यात्रा, खड़गे-प्रियंका फैक्टर, 5 गारंटी और आरक्षण, कर्नाटक में कांग्रेस इसलिए बनी 'किंग'

6 महीने के भीतर BJP को ये दूसरा बड़ा झटका लगा है. पहले हिमाचल प्रदेश में BJP की सत्ता चली गई और अब पार्टी के हाथ से कर्नाटक भी फिसल चुका है.
NDTV Profit हिंदीनिलेश कुमार
NDTV Profit हिंदी03:18 PM IST, 13 May 2023NDTV Profit हिंदी
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Congress in Karnataka Election Results 2023: कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है. 224 सीटों वाली कर्नाटक विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 113 है और कांग्रेस ने 135 सीटों पर जीत दर्ज की है. यानी कांग्रेस यहां अपने दम पर सरकार बनाने जा रही है.

मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई (Basavaraj Bommai) ने ये कहते हुए हार मान ली है कि प्रधानमंत्री और BJP कार्यकर्ताओं की अथक मेहनत के बावजूद हम जरूरी आंकड़े तक नहीं पहुंच पाए.'

6 महीने के भीतर BJP को ये दूसरा बड़ा झटका लगा है. इससे पहले हिमाचल प्रदेश में भी BJP की सत्ता चली गई और अब पार्टी के हाथ से कर्नाटक भी फिसल चुका है. वहीं देश भर में राजनीतिक चुनौतियों से जूझ रही कांग्रेस के लिए कर्नाटक की जीत संजीवनी साबित हो सकती है.

कांग्रेस के बेहतरीन प्रदर्शन के बाद प्रदेश अध्यक्ष DK शिवकुमार भावुक दिखे. उन्होंने सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का धन्यवाद देते हुए इसे कांग्रेस के सामूहिक प्रयास का नतीजा बताया.

आइए कांग्रेस के इस शानदार प्रदर्शन के पीछे की 5 बड़ी वजहें समझने की कोशिश करते हैं.

1. कांग्रेस की 'भारत जोड़ो यात्रा'

कांग्रेस की इस जीत के पीछे राहुल गांधी की 'भारत जोड़ो यात्रा' को बड़ा कारण बताया जा रहा है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दक्षिण भारत से ही इसकी शुरुआत की. कन्याकुमारी से जम्मू-कश्मीर तक की यात्रा ने कर्नाटक में कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाइयों को खत्म करते हुए पार्टी को मजबूत किया. इस यात्रा के जरिये कांग्रेस पूर्व CM सिद्धारमैया और को DK शिवकुमार को साथ लेकर आई. इसका फायदा भी दिखा.

2. खड़गे का कांग्रेस अध्यक्ष बनना

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव लंबे समय से टलता आ रहा था, लेकिन कर्नाटक चुनाव से पहले गांधी परिवार के करीबी मल्लिकार्जुन खड़गे सामने आए और जैसा कि तय था, जीते भी. कर्नाटक से दलित चेहरे को आगे कर कांग्रेस ने एक बड़े वोट बैंक को अपने पाले में किया, जो पार्टी से छिटक रहा था. कर्नाटक से दलित चेहरे को चुनना कांग्रेस के लिए मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ.

3. पांच गारंटी के तहत कांग्रेस के लोकलुभावन वादे

कांग्रेस ने अपने मेनिफेस्टो में लोकलुभावन वादे किए. गृह ज्योति के तहत हर महीने 200 यूनिट बिजली मुफ्त देने का ऐलान किया. हर ​BPL परिवार के लिए प्रति व्यक्ति 10 किलो अनाज फ्री देने और हर परिवार की मुख्य महिला को हर महीने 2,000 रुपये देने का वादा किया. युवा निधि के तहत युवाओं को भत्ता देने और शक्ति स्कीम के तहत बसों में महिलाओं के लिए नि:शुल्क ट्रैवल की सुविधा देने का भी वादा किया.

हिमाचल में जीत के बाद जिस तरह कांग्रेस ने OPS और अन्य वादों को लागू किया, इससे कर्नाटक की जनता के बीच भी वादों को लेकर पार्टी का भरोसा बना. इसके अलावा कांग्रेस भ्रष्टाचार और ध्रुवीकरण के मुद्दे पर BJP पर भारी पड़ी. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा है कि कर्नाटक की जनता से किए 5 वादे, पहले ही दिन, पहली कैबिनेट मीटिंग में पूरा करेंगे.

4. कर्नाटक के दिल में ऐसे उतरीं प्रियंका

कर्नाटक में कांग्रेस के शानदार प्रदर्शन के पीछे पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी की बड़ी भूमिका रही. कर्नाटक के हर क्षेत्र में उन्होंने रैलियां कीं. पूरे अभियान के दौरान प्रियंका गांधी ने 13 रैलियां, 12 रोड शो, 2 महिला सभाएं और 1 कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित किया. उनमें देखी जाने वाली इंदिरा गांधी की छवि, महिलाओं और युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता, मिलनसार व्‍यक्तित्‍व, आक्रामक भाषण और दिल छू लेने वाली शैली ने उन्हें कर्नाटक में लोकप्रिय किया.

5. आरक्षण पर 'वायदा का फायदा'

कर्नाटक में आरक्षण पर कांग्रेस का वादा BJP पर भारी पड़ा. फायदे की उम्मीद में BJP ने 4% मुस्लिम आरक्षण खत्म कर लिंगायत और अन्य वर्ग में बांट दिया था. लेकिन कांग्रेस ने ऐन वक्त पर बड़ा दांव खेल दिया. अपने मेनिफेस्टो में कांग्रेस ने आरक्षण का दायरा 50% से बढ़ाकर 75% करने का ऐलान कर दिया. इस बढ़े दायरे में लिंगायत, दलित, ओबीसी सभी आ गए. मुस्लिमों को उनके हिस्से का 4% आरक्षण लौटाने का भी वादा किया. इससे पार्टी को बड़ा फायदा मिला.

2024 के लिए कांग्रेस को मिलेगी 'संजीवनी'

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजे कांग्रेस के लिए बेहद अहम हैं. राष्ट्रीय स्तर पर कई तरह की राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही कांग्रेस को हिमाचल प्रदेश के बाद कर्नाटक से ऊर्जा मिलेगी और विपक्षी दलों के बीच उसकी पैठ मजबूत होगी. चूंकि कर्नाटक संसाधन संपन्न राज्य माना जाता है तो 2024 में होने वाले चुनाव को लेकर ये जीत कांग्रेस के लिए संजीवनी साबित होगी.

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