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अब कुंभ मेले में नहीं बिछड़ते लोग, डिजिटल खोया-पाया केंद्रों ने 20,000 से ज्यादा बिछड़ों को अपनों से मिलाया

इस बार के महाकुम्भ के विराट मेले में अपनों से बिछड़े हुए कुल 20,144 लोगों को उनके परिवारों से मिलाने में योगी सरकार को सफलता मिली है.
NDTV Profit हिंदीNDTV Profit डेस्क
NDTV Profit हिंदी03:47 PM IST, 16 Feb 2025NDTV Profit हिंदी
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कुंभ के मेले में बिछड़ने और मिलने की कहानियां आम हैं. आपने अक्सर लोगों को कहते सुना होगी कि, 'अरे कुंभ के मेले में बिछड़ गए थे' क्या या 'जैसे कुंभ के मेले में बिछड़े दो भाई. क्योंकि सिर्फ कुंभ ही नहीं अक्सर भीड़-भाड़ वाली जगहों पर लोगों का अपनों से बिछड़ना आप सी बात है पर कुंभ का जिक्र इसलिए किया जाता है क्योंकि हमेशा से ही कुंभ मेले में करोड़ों लोगों का हुजुम उमड़ता आया है. पर प्रयागराज के महाकुंभ 2025 ने इस अवधारणा को गलत साबित कर दिया है. महाकुंभ मेले में बिछड़ने और फिर मिलने वालों के आंकड़ों ने ये सिद्ध कर दिया है कि, अब लोग कुंभ के मेले में नहीं बिछड़ते हैं.

दरअसल महाकुंभ 2025 में ऐसी व्यवस्था की गई है जिससे मेले में बिछड़े लोग आसानी से अपने परिवार तक पहुंच सकते हैं और ये नई तकनीकी है- डिजिटल खोया-पाया केंद्र, अब इस तकनीक के साथ वे आसानी से अपने परिजनों तक पहुंच सकते हैं. यह बदलाव न केवल लोगों की जिंदगी को आसान बना रहा है, बल्कि महाकुंभ की पहचान को भी नया आयाम दे रहा है.

महाकुंभ में डिजिटल खोया-पाया केंद्रों की स्थापना

2025 में 144 सालों बाद पुण्य का ऐसा योग बना है, 14 जनवरी को शुरू हुआ ये अध्यात्म का महामेला 26 फरवरी तक चलेगा. इस मौके पर देश-विदेश से अब तक कुल 50 करोड़ से भी ज्यादा लोगों ने संगम में पवित्र डुबकी लगाई है.

जाहिर सी बात है कि इतने बड़े जनसैलाब की सुरक्षा और सुव्यवस्था को बनाए रखने के लिए प्रदेश सरकार ने को खास इंतजाम करने में को कसर नही छोड़ी. और इसका सबसे बड़ा प्रमाण है डिजिटल खोया-पाया केंद्र. महाकुंभ में खोए हुए लोगों को शीघ्रता से उनके परिवारों से मिलाने के लिए योगी सरकार की ओर की गई इस पहल के जरिए अब तक कुल 20,000 से भी ज्यादा लोगों को उनके परिवारों से मिलाया गया है.

अब तक कुल 20,144 लोगों की हुई पहचान

इस बार के महाकुंभ के विराट मेले में अपनों से बिछड़े हुए कुल 20,144 लोगों को उनके परिवारों से मिलाने में योगी सरकार को सफलता मिली है. इनमें बड़ी संख्या महिलाओं की रही. यही नहीं पुलिस ने देश के विभिन्न राज्यों और नेपाल से आए श्रद्धालुओं को उनके परिवारों से मिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

अमृत स्नान के दिन कई बिछड़े अपनों से मिले

अमृत स्नान पर्व मौनी अमावस्या के दौरान (28, 29 और 30 जनवरी) को भीड़ का प्रबंधन करते हुए डिजिटल खोया-पाया केंद्रों ने खोए हुए सभी 8,725 लोगों को उनके परिवारों कों सौंप है. इसी प्रकार मकर संक्रांति पर्व (13, 14 और 15 जनवरी) को खोए हुए 598 श्रद्धालु और बसंत पंचमी (2, 3 और 4 फरवरी) को 813 श्रद्धालुओं को डिजिटल खोया-पाया केंद्र की मदद से उनके परिजनों से मिलवाया गया.

डिजिटल खोया-पाया केंद्रों में AI की अहम भूमिका

डिजिटल खोया-पाया केंद्रों में अत्याधुनिक AI आधारित चेहरा पहचान प्रणाली, मशीन लर्निंग और बहुभाषीय समर्थन जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं प्रदान की गई हैं. इससे मेला क्षेत्र में बिछड़े हुए श्रद्धालुओं को तेजी से उनके परिवारों से मिलाया जा सका है. डिजिटल खोया-पाया केंद्रों में उत्तर प्रदेश पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी और विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों की अहम भूमिका रही. इसमें यूनिसेफ सहित कई गैर-सरकारी संगठनों ने भी सक्रिय योगदान दिया. किसी भी प्रकार की सहायता के लिए श्रद्धालु नजदीकी डिजिटल खोया-पाया केंद्र से संपर्क कर सकते हैं या आधिकारिक हेल्पलाइन 1920 पर कॉल कर सकते हैं.

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