रेंटल इनकम (Rental Income) चाहे वो रेसिडेंशियल प्रॉपर्टी से आए या कमर्शियल प्रॉपर्टी से कमाई का एक मजबूत साधन होती है. रियल एस्टेट सेक्ट में कई इन्वेस्टर्स मकान या कमर्शियल प्रॉपर्टी एक मजबूत एडिशनल इनकम बनाने के लिए करते हैं. जिससे उनके पोर्टफोलियों में विवधता भी आ जाती है और इनकम की नई स्ट्रीम भी बन जाती है.
प्रॉपर्टी मालिकों का सपोर्ट करने के लिए, सरकार किराए पर दी गई प्रॉपर्टी पर कईं तरह के टैक्स फायदे देती है, जिसका इस्तेमाल व्यक्ति अपनी टैक्सेबल इनकम को काफी कम करने के लिए कर सकता है. हालांकि किसी भी संभावित पेनल्टी से बचने के लिए इन टैक्सेशन कानूनों को अच्छी समझ बहुत जरूरी है.
रेंटल इनकम पर कौन से टैक्सेशन कानून और कटौती लागू होती हैं?
इनकम टैक्स कानून के अनुसार रेंटल इनकम " इनकम फ्रॉम हाउस प्रॉपर्टी " के दायरे में आती है. ये कानून कुछ कटौती (deductions) के साथ आते हैं जिनका फायदा टैक्सेबल इनकम को कम करने के लिए उठाया जा सकता है.
स्टैंडर्ड डिडक्शन: इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 24A के तहत, किराए पर दी गई प्रॉपर्टी के लिए सरकार नेट एनुअल वैल्यू (net annual value ) पर 30% के स्टैंडर्ड डिडक्शन की अनुमति देती है. जिसका लक्ष्य प्रॉपर्टी के मालिकों पर मरम्मत और रखरखाव की लागत को कवर करने और वित्तीय बोझ को कम करना है.
म्युनिसिपल टैक्स: इनकम टैक्स एक्ट के तहत प्रॉपर्टी टैक्स जैसे म्युनिसिपल टैक्स को प्रॉपर्टी की एनुअल इनकम से काटा जा सकता है. हालांकि, इस डिडक्शन का दावा किरायेदार नहीं कर सकते हैं और अगर टैक्स का भुगतान मालिक द्वारा किया जाता है तभी इसकी अनुमति है.
वैकेंसी पीरियड: अगर कोई प्रॉपर्टी या उसका कोई हिस्सा पूरे FY के लिए खाली रहता है, और खाली होने के कारण उसका किराया अपेक्षा से कम होता है, तो टैक्सेशन नियमों के अनुसार कम किया गया किराया ग्रॉस एनुअल वैल्यू (Gross Annual Value) माना जाएगा.
को-ओनरशिप: जब कोई प्रॉपर्टी को-ओनरशिप वाली होती है, तो प्रॉपर्टी मालिक अपने हिस्से के आधार पर एक अलग डिडक्शन का दावा कर सकता है, जो ओवरऑल टैक्स लायबिलिटी को कम करने में मदद कर सकता है. उदाहरण के लिए, अगर कोई कपल ज्वाइंट रूप से एक घर का मालिक है और उसे किराए पर देता है, तो वे रेंटल इनकम को आपस में बांट सकते हैं और हर व्यक्ति इनकम के अपने व्यक्तिगत हिस्से पर टैक्स का भुगतान करेगा.
सेक्शन 80C: इनकम टैक्स एक्ट की सेक्शन 80C के तहत 1,50,000 रुपये तक के होम लोन रिपेमेंट पर छूट मिलती है, भले ही प्रॉपर्टी का मालिकाना हक की हो या किराए पर ली गई हो.
डेप्रिसिएशन: वैसे तो टैक्सेशन नियमों में डेप्रिसिएशन के लिए ‘इनकम फ्रॉम हाउस प्रॉपर्टी’ के तहत कोई डायरेक्ट कटौती नहीं है. लेकिन अगर प्रॉपर्टी किसी बिजनेस एसेट का हिस्सा है तो डेप्रिसिएशन के लिए कटौती का दावा किया जा सकता है, खासकर कमर्शियल प्रॉपर्टी के मामले में.