IDBI बैंक का विनिवेश का काम पटरी पर है. डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट के सचिव अरुणीश चावला के मुताबिक, भारत सरकार एसेट की बिक्री की योजना के साथ आगे बढ़ रही है. इनमें IDBI बैंक में हिस्सेदारी की बिक्री और जीवन बीमा निगम (LIC) में और ज्यादा विनिवेश शामिल हैं. उन्होंने कहा कि ये वित्त वर्ष के लिए बड़ी विनिवेश की रणनीति का हिस्सा है.
MTNL के एसेट्स को मॉनेटाइज करने की भी कोशिश
चावला ने NDTV प्रॉफिट को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि वैश्विक आर्थिक स्थिति अनिश्चित बनी हुई है. उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और केंद्रीय उद्यमों में विनिवेश के जरिए रेगुलेटरी नियमों का पालन करना है.
उन्होंने MTNL की जमीन और इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स को मॉनेटाइज करने की कोशिशों का भी जिक्र किया. उन्होंने मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग टार्गेट्स को पूरा करने के लिए सही दृष्टिकोण की पुष्टि की.
IDBI में हिस्सेदारी की बिक्री पर क्या राय है?
सटीक समयसीमा के बारे में नहीं बताते हुए चावला ने जोर दिया कि एसेट की बिक्री को चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा. उन्होंने कहा कि अहम ट्रांजैक्शंस के लिए पहले ही कई बोलियां मिल चुकी हैं. इनमें सरकारी बैंकों में हिस्सेदारी की बिक्री शामिल है. IDBI बैंक के ट्रांजैक्शन पर विचार जारी है.
उन्होंने कहा कि सरकार ने कुछ फर्मों के लिए SEBI के पब्लिक फ्लोट नियमों का पालन करने की समयसीमा भी बढ़ा दी है, जिससे पता चलता है कि अगली फिस्कल साइकिल में प्रमुख बिक्री को अलग-अलग किया जा सकता है.
चावला ने कहा कि IDBI बैंक में हिस्सेदारी की बिक्री योजना के अनुसार आगे बढ़ रही है और मैक्रो इकॉनोमिक झटकों से असर नहीं पड़ा है.
उन्होंने कहा, 'एक डेटा रूम शुरू किया गया है और जरूरी चर्चा पूरी हो चुकी है. शेयर खरीद समझौते पर बातचीत अभी चल रही है.
LIC में सरकारी हिस्सेदारी पर क्या कहा?
LIC में और अधिक हिस्सेदारी कम करने के सवाल पर चावला ने कहा कि सरकार का लक्ष्य सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया के मानदंडों के अनुरूप मार्च 2027 को खत्म होने वाले वित्त वर्ष तक मिनिमम शेयरहोल्डिंग की जरूरत को पूरा करना है.
उन्होंने कहा कि निवेशकों की कमजोर भावना का मतलब जरूरी नहीं कि प्रगति रुक जाए. चावला ने कहा, 'एक आम गलती ये मान लेना है कि निवेशकों की कमजोर भावना के कारण कुछ भी नहीं होगा. बाजार में ट्रंप के मूड के बावजूद हमारे इन-हाउस रिसर्च से पता चलता है कि कुछ स्टॉक अच्छे हेज हैं. वे आकर्षक डिविडेंड देते हैं और सरकार की निरंतर पूंजी व्यय नीति के अनुरूप हैं.'