संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने भारत के साथ तनाव और पहलगाम आतंकी हमले को लेकर बंद कमरे में हुई बैठक में पाकिस्तान को घेरा है. UNSC के सदस्यों ने पिछले महीने पहलगाम में हुए हमले में पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के शामिल होने को लेकर सवाल खड़े किए हैं.
UNSC सचिव एंटोनियो गुटेरेस ने पहलगाम हमले की कड़ी निंदा की और आतंक के खिलाफ कार्रवाई पर जोर दिया. कुछ देशों ने धर्म के आधार पर पर्यटकों को निशाना बनाए जाने को बेहद चिंताजनक बताया.
पाकिस्तान, जिस तरह अपने घड़ियाली आंसू लेकर UNSC पहुंचा था, कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर फिर से उठाने और पहलगाम हमले का ठीकरा भारत के सिर फोड़ने की का नापाक दांव उसे ही भारी पड़ा. इस बार भी उसे कामयाबी नहीं मिली.
भारत से बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान के अनुरोध पर सोमवार, 5 मई को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में बंद दरवाजों के पीछे विचार-विमर्श (कंसल्टेशन) बैठक हुई, लेकिन यहां पाकिस्तान को ही घेरा गया.
सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में पहलगाम में हुए आतंकी हमले को लेकर पाकिस्तान के 'फॉल्स फ्लैग' वाले दावे को सदस्य देशों ने खारिज कर दिया. पाकिस्तान ने आरोप लगाया था कि ये हमला भारत की ओर से खुद कराया गया है, लेकिन सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने इस थ्योरी पर यकीन नहीं किया.
बैठक के दौरान पाकिस्तान से ये भी पूछा गया कि क्या इस हमले में लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठन की भूमिका नहीं हो सकती है. पहलगाम हमले की बैठक में व्यापक निंदा की गई और जिम्मेदारों को सजा देने की आवश्यकता पर जोर दिया गया.
NDTV के फाॅरेन अफेयर्स एडिटर उमाशंकर सिंह के मुताबिक, सबसे अहम बात यह रही कि पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर लाना चाहता था, लेकिन सुरक्षा परिषद ने उसकी कोशिशों को सिरे से नकार दिया. उसे स्पष्ट सलाह दी गई कि इस मुद्दे को भारत के साथ द्विपक्षीय बातचीत के जरिये सुलझाया जाए.
कई सदस्य देशों ने ये चिंता भी जताई कि पाकिस्तान की ओर से बार-बार मिसाइल परीक्षण और परमाणु हथियारों पर बयानबाजी, क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा रही है.
इस समय सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता ग्रीस के पास है. करीब डेढ़ घंटे तक चली इस बैठक के बाद UNSC की ओर से कोई संयुक्त बयान जारी नहीं किया गया.
इस मीटिंग से पहले संयुक्त राष्ट्र में भारत के पूर्व स्थाई प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने PTI से बातचीत में कहा था कि ऐसी बंद कमरे की चर्चाओं से किसी ठोस नतीजे की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए. उन्होंने कहा, 'संघर्ष का एक पक्ष अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए इस मंच का इस्तेमाल करना चाहता है, लेकिन भारत इन कोशिशों को महत्व नहीं देता.'
वहीं मीटिंग के बाद भी अकबरुद्दीन ने दो टूक कहा, 'जैसा पहले हुआ, वैसा ही इस बार भी हुआ. पाकिस्तान की नापाक कोशिश एक बार फिर नाकाम रही. न तो UNSC की तरफ से कोई प्रतिक्रिया आई और न ही पाकिस्तान को कोई समर्थन मिला.' भारतीय कूटनीति ने पाकिस्तान के इस प्रयास को फेल कर दिया है.