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US Debt Ceiling Bill: अमेरिका से डेट डिफॉल्ट का खतरा टला, US कांग्रेस के बाद सीनेट से भी पास हुआ बिल

अब राष्ट्रपति जो बाइडेन (Joe Biden) इस बिल पर हस्ताक्षर करेंगे और ये एक्ट के रूप में अमेरिका में लागू हो जाएगा.
NDTV Profit हिंदीNDTV Profit डेस्क
NDTV Profit हिंदी09:04 AM IST, 02 Jun 2023NDTV Profit हिंदी
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US Debt Ceiling Bill Passed: अमेरिका में डेट डिफॉल्ट और दुनिया से वित्तीय संकट का का खतरा टल गया है. US कांग्रेस से पास होने के बाद अब अमेरिकी सीनेट से भी डेट सीलिंग बिल पास हो गया है.

अब राष्ट्रपति जो बाइडेन (Joe Biden) इस बिल पर हस्ताक्षर करेंगे, जो कि सिर्फ एक औपचारिकता भर है. उम्मीद की जा रही है कि बिल पर बाइडेन आज ही हस्ताक्षर कर देंगे.

इस तरह 5 जून की डेडलाइन से 3 दिन पहले ही इस बिल को राष्ट्रपति बाइडेन ने पास करवा लिया है. जिसके बाद वो कर्ज की सीमा को बढ़ा सकेंगे जो 2 साल के लिए लागू रहेगी.

63-36 वोटों से पास हुआ बिल

अमेरिकी सीनेट ने 63-36 वोटों से राजकोषीय उत्तरदायित्व विधेयक (The Fiscal Responsibility Bill) पास किया है. यानी इसके पक्ष में 63 वोट पड़े, जबकि विरोध में 36 वोट. डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों पार्टियों के नरमपंथी नेताओं ने बिल को अपना समर्थन दिया.

सरकारी खर्च सीमित करने का प्रस्ताव

US कांग्रेस और सीनेट से पास हुए इस बिल में कर्ज सीमा बढ़ाने और सरकार के खर्च को सीमित करने का प्रस्ताव है. राष्ट्रपति जो बाइडेन और हाउस स्पीकर केविन मैककॉर्थी के साथ लंबी बातचीत के बाद डेट सीलिंग पर ​डील तय हो पाई थी. दोनों नेताओं ने अमेरिका के डिफॉल्ट संकट को टालने के लिए इस बिल को तैयार करने में अहम भूमिका निभाई.

बाइडेन बोले- ये अमेरिका के लिए बड़ी जीत

बिल पर वोटिंग के बाद बाइडेन ने एक बयान में कहा, 'बातचीत में किसी को भी वो सब कुछ नहीं मिलता जो वे चाहते हैं, लेकिन इसके चलते कोई गलती नहीं करनी चाहिए. ये द्वि-दलीय समझौता हमारी अर्थव्यवस्था और अमेरिकी लोगों के लिए एक बड़ी जीत है.'

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, सीनेट में डेट सीलिंग बिल को दोनों पार्टियों से 63 नेताओं ने समर्थन दिया, जबकि 36 नेताओं ने इसके विरोध में वोट डाले. दोनों ही पार्टियों में बिल पर नरम रुख रखने वाले नेताओं ने बाइडेन का साथ दिया. वहीं कुछ नेता इस बिल को लेकर गलतफहमी में थे. हालांकि बिल को लेकर राष्ट्रपति बाइडेन ने पहले भी कहा था, 'किसी भी पक्ष को वो 'सब कुछ' नहीं मिल सकता, जो वे चाहते हैं.'

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